देवरिया। मेडिकल कॉलेज में दुर्व्यवस्था से मरीज व तीमारदार परेशान हैं। डॉक्टर और स्टाफ को भी इसका दंश झेलना पड़ता है। एसी खराब, पंखा खराब होने से बीमार बच्चे बेहाल रहते हैं वहीं तीमारदारों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। डॉक्टर और स्टाफ भी परेशान रहते हैं। दोपहर बाद सुरक्षा कर्मी के न होने से तीमारदार अक्सर उलझ जाते हैं। रात में तो डर बना रहता है। एसी न होने से मरीजों में संक्रमण बढ़ने की भी संभावना रहती है।
मौसम बदलने से संक्रामक बीमारियों के फैलने की संभावना अधिक रहती है। इसकी चपेट में आने से बच्चे पीड़ित होते हैं। बुखार, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, सांस सहित अन्य बीमारियों से बच्चे पीड़ित होते हैं। मेडिकल कॉलेज में गंभीर बच्चों के इलाज के लिए 15 बेड का पीआईसीयू है, लेकिन यहां व्यवस्था ठीक न होने से मरीज के साथ तीमारदार और कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दस बेड के वार्ड में पांच एसी और पांच पंखा लगा हैं, लेकिन दो एसी और दो पंखा काम कर रहा है, जबकि तीन एसी और पंखा खराब है, जबकि पांच बेड के वार्ड की हालत काफी दयनीय है। यहां लगा दो एसी काफी दिनों से शो पीस बना है। मात्र एक वालफैन है, जो ठीक से हवा नहीं देता है। इन दिन मरीजों की संख्या अधिक होने से एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जाता है। रात के समय सुरक्षा कर्मी के न होने पर शांत कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
बुधवार को तीमारदारों के बार-बार शिकायत करने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने उच्चाधिकारियों को समस्या से फिर अवगत कराया और समाधान कराने को कहा। इसके बाद सीएमएस डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अजीत पाल, पीआईसीयू के नोडल अधिकारी डॉ. आरके श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार पीआईसीयू पहुंचे और समाधान की बात कहे। बुधवार को अस्पताल में 41 बच्चे भर्ती थे। 15 बेड के पीआईसीयू में 20 मरीजों का इलाज चल रहा था, जबकि 20 बेड का चिल्ड्रेन वार्ड में बेड फुल थे।
कोट
पीआईसीयू की एसी खराब है। उसकी मरम्मत कराई गई, लेकिन ठीक से काम नहीं कर रही है। नई एसी मंगाने की प्रक्रिया की जा रही है। जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।
डॉ. पुरुषोत्तम कुमार, जनसंपर्क अधिकारी