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जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास की कार्रवाई फंसी

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जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई फंसी
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सदस्यों का प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिला, चुनाव कराने की मांग की
शासन से अनुमति मिलने के इंतजार में डीएम, सदस्यों ने लगाया आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शासन और जिला प्रशासन के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई फंसी हुई हैं। शनिवार को जिला पंचायत सदस्यों का एक प्रतिनिधि मंडल डीएम अमित किशोर से मिलकर चुनाव की तिथि घोषित कराने की मांग की। आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के एक नेता के दबाव में आकर प्रशासन टालमटोल करने में जुटा है। दीपक मणि का अपहरण कर जमीन बैनामा कराने के मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव समेत पांच पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ और जेल भेज दिए गए। रामप्रवेश के जेल में बंद होने के दौरान भी सदस्यों ने अविश्वास लाने का प्रयास किया था, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। उधर जेल से रिहाई के बाद कुर्सी हथियाने की रामप्रवेश ने पुरजोर कोशिश की, लेकिन कानूनी प्रक्रिया में उलझ गए और शासन के निर्देश पर डीएम कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए गए। 16 जनवरी को 34 जिला पंचायत सदस्यों ने सीडीओ को जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास का नोटिस दिया। सदस्यों का कहना है कि नोटिस देने के 15 दिन बाद जिला प्रशासन वोटिंग की तिथि घोषित करता है। लेकिन जिला प्रशासन मामले को टालने के लिए शासन को पत्र भेजकर अनुमति मांगी है। सत्ता पक्ष के एक कद्दावर नेता के इशारे पर जिला प्रशासन ऐसा कर रहा है। जिला पंचायत सदस्यों ने टेंडर कराने और अविश्वास की कार्रवाई को पूरा करने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर सदस्यों ने मुख्यमंत्री से शिकायत और आंदोलन की चेतावनी दी है। इस दौरान अशोक यादव, भाजपा नेता कृपाशंकर उपाध्याय, सुमेश्वर नाथ तिवारी, इंद्रदेव अंबेडकर, सिकंदर यादव, रवि प्रकाश कुशवाहा, सदस्य पति विनय सिंह, राजेंद्र यादव, गिरेंद्र प्रताप यादव, वीरेंद्र चौधरी आदि मौजूद रहे।
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