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Deoria News: मखाना खेती की शुरुआत करने वाला पूर्वांचल का पहला जिला बना देवरिया

Sat, 09 Dec 2023 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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मखाना की खेती का तिलिस्मी रहस्य मिथिला से पहुंचा देवरिया
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मखाना खेती से बदलेगी जनपद की तस्वीर : डीएम

तरकुलवा ब्लॉक के हरैया ग्राम पंचायत के प्रगतिशील मत्स्य पालक के तालाब में बेहन के लिए हुआ बीज का छिड़काव

देवरिया। मखाना खेती का तिलिस्मी रहस्य जनपद पहुंच गया है। सदियों तक मखाना की खेती पर बिहार के मिथिला क्षेत्र का एकाधिकार रहा है। जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह की अनूठी पहल पर शुक्रवार को तरकुलवा ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत हरैया में प्रगतिशील मत्स्य पालक गंगा शरण श्रीवास्तव के तालाब में मखाना की बेहन (नर्सरी) तैयार करने के लिए बीज डाली गई। इसके साथ ही देवरिया मखाना खेती की शुरुआत करने वाला पूर्वांचल का प्रथम जनपद बन गया।
मत्स्य विभाग के अधिकारी राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा से 25 किलो मखाना का बीज लेकर आए थे। बेहन की प्रक्रिया मत्स्य विभाग के सेवानिवृत्त सहायक निदेशक डॉ. डीएन पांडेय की देखरेख में हुई। उन्होंने बताया कि देवरिया की मिट्टी, पानी और जलवायु दरभंगा क्षेत्र की ही तरह है। यहां मखाना की खेती में दरभंगा जैसी पैदावार संभव है। उन्होंने बताया कि बेहन के लिए डाले गए मखाना के बीज स्वर्ण वैदेही प्रजाति की है, जिसे काला हीरा के नाम से भी जाना जाता है। मखाना मीठे जल की फसल है। आज डाले गए बीज की पौध फरवरी माह तक तैयार होगी जिसके बाद उसकी रोपाई की जाएगी। मखाना की फसल तैयार होने में नौ माह का समय लगता है और प्रति हेक्टेयर 28 से 30 क्विंटल पैदावार हासिल होती है। प्रति क्विंटल मखाना का बाजार मूल्य 35 से 40 हजार रुपये तक होता है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य विभाग नंदकिशोर ने बताया कि मत्स्यपालकों की ओर से मखाना की खेती करने का उन्हें दोहरा लाभ मिलेगा। मछली के साथ-साथ मखाना की उपज उनकी आय में बढ़ोतरी करेगी।
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सीडीओ प्रत्यूष पांडेय ने कहा कि प्रथम चरण में मखाना की खेती के लिए आठ प्रगतिशील मत्स्यपालकों को चिह्नित किया गया है। इन सभी को कैपिसिटी बिल्डिंग के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और मखाना की खेती से जुड़ी बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। किसानों को साइट विजिट भी कराई जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि कभी चीनी के कटोरे के नाम से मशहूर रहा जनपद यहां के किसानों और मत्स्यपालकों के परिश्रम के चलते जल्द ही मखाना के लिए जाना जाएगा। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और आर्थिक तरक्की की नई राह खुलेगी।
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