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ब्लैक फंगस से रुद्रपुर की महिला की लखनऊ में मौत

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ब्लैक फंगस से रुद्रपुर की महिला की लखनऊ में मौत
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रुद्रपुर। अभी कोरोना के कहर से उबरने की कोशिश कर रहे रुद्रपुर क्षेत्र के लोगों को खतरनाक ब्लैक फंगस की मार झेलनी पड़ रही है। ब्लैक फंगस की चपेट में आने से खोरमा गांव की 60 वर्षीय महिला की सोमवार की सुबह मौत हो गई। उनका इलाज लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में चल रहा था। इसके अलावा कोरोना से उबरने के बाद क्षेत्र के कई मरीज ब्लैक फंगस से पीड़ित चल रहे हैं। इससे पीड़ित लोगों का इलाज लखनऊ के बड़े अस्पतालों में चल रहा है।
मूलत: बंगाल के रहने वाले आरएन विश्वास करीब 50 वर्षों से रुद्रपुर के खोरमा गांव में मकान बनाकर आबाद हैं। उनकी पत्नी श्यामली विश्वास (60) की 12 मई को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्हें देवरिया के एल टू कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार नहीं होने पर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। 18 मई को उनमें ब्लैक फंगस के लक्षण दिखने पर चिकित्सकों की सलाह पर परिजन उन्हें लखनऊ के निजी अस्पताल में भर्ती कराए। निजी अस्पताल में ब्लैक फंगस की दवाई नहीं मिलने पर 20 मई को केजीएमयू में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार, उन्हें आईसीयू बेड की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल में आईसीयू बेड खाली नहीं था। तीमारदार की सहमति से डाक्टर उनका इलाज जनरल वार्ड में करने लगे। इलाज के दौरान 24 मई की सुबह उनकी मौत हो गई। आईसीयू में उचित इलाज नहीं मिलने से श्यामली को जान गंवानी पड़ी।
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दवाई की किल्लत से हो रही मौत
महंगे इलाज से मध्यम वर्ग परेशान
सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल रहे आईसीयू बेड
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। कोरोना महामारी के बीच ब्लैक फंगस जानलेवा साबित हो रहा है। दवाई की किल्लत और महंगा इलाज फंगस से संक्रमितों पर भारी पड़ रहा है। ब्लैंक फंगस में लगने वाला इंजेक्शन और दवाइयों के वितरण का अधिकार सरकार ने चुनिंदा संस्थानों को दिया है। लखनऊ में बीमारी से ग्रसित होने पर डाक्टर के दवा सुझाने के बाद कमिश्नर के आदेश पर रेडक्रास सोसाइटी तीमारदारों को दवा उपलब्ध करा रही है। ब्लैक फंगस की दवा लेने को मरीज को तीन चार दिन कमिश्नर आफिस से लेकर दवा वितरण केंद्र का चक्कर काटना पड़ रहा है। फंगस की चपेट में आए मरीजों को इंजेक्शन की पांच डोज लगाई जा रही है। पांच डोज की कीमत लगभग 30 हजार है। वहीं इस बीमारी में दी जाने वाली दवाइयां एक तो काफी महंगी हैं दूसरे खुले बाजार में नहीं मिल रही हैं। ब्लैक फंगस के मरीज बढ़ने से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। अपनी मां श्यामली का इलाज करा रहे बेटे अनूप विश्वास ने कहा कि दवाई की किल्लत और बेड के अभाव में मां को जान गंवानी पड़ी। केजीएमयू में मरीज भर्ती तो हो गया लेकिन आईसीयू बेड नहीं मिला। उन्हें तत्काल आईसीयू बेड की जरूरत थी। डॉक्टरों को अपने रिस्क पर इलाज कराने का लिखित नोट देने पर जनरल वार्ड में इलाज शुरू हुआ। जो ब्लैंक फंगस के मरीज के लिए काफी नहीं था। ब्लैक फंगस का इंजेक्शन और दवा के लिए काफी भागदौड़ करने के बाद भी सफलता नहीं मिली।
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