बघौचघाट। पिता के हाथों में ई-रिक्शा का हैंडल और बेटी के हाथों में कामयाबी की उम्मीद। परिवार की सीमित कमाई के बीच मुस्लिम सिद्दीकी ने बेटियों के सपनों को कभी आर्थिक तंगी की बेड़ियों में नहीं बांधा। उनके इसी विश्वास ने शिफा खातून को कबड्डी के मैदान तक पहुंचाया, जहां वह अपनी प्रतिभा के दम पर नई पहचान बना रही है। दो बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकीं शिफा आज उन बेटियों की मिसाल हैं, जिनके हौसले के आगे मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती हैं।
मुस्लिम सिद्दीकी की सबसे छोटी बेटी शिफा कक्षा 11 की छात्रा है। वह आगरा स्थित खेल हॉस्टल में रहकर अंडर-17 में कबड्डी का प्रशिक्षण ले रही है। वर्ष 2023 में आंध्र प्रदेश और 2024 में महाराष्ट्र में आयोजित अंडर-14 राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिताओं में वह प्रदेश की टीम का हिस्सा बनीं। अब उनका चयन स्कूल स्टेट कबड्डी प्रतियोगिता के लिए हुआ है। गोरखपुर में 13 से 15 अक्तूबर तक होने वाली प्रतियोगिता में वह अपना दमखम दिखाएंगी।
शिफा की सफलता के पीछे पिता का संघर्ष और मां साबिया खातून का समर्पण भी है। ई-रिक्शा चलाकर परिवार की जरूरतें पूरी करने वाले मुस्लिम सिद्दीकी ने बेटियों को आगे बढ़ने का हौसला दिया। वहीं गृहिणी साबिया उनकी तैयारी, खानपान और मानसिक मजबूती का ध्यान रखती हैं।
बड़ी बहन रुकसार खातून भी फुटबॉल खिलाड़ी हैं। एक ही परिवार की बेटियों का खेल के मैदान में आगे बढ़ना साबित करता है कि हौसलों को पंख मिल जाए तो अभाव भी कामयाबी की राह नहीं रोक सकते।