फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई जल्द
एसटीएफ ने सौंपी 30 से अधिक फर्जी शिक्षकों की सूची
50 और शिक्षक आए जांच टीम की जद में
टीम के पुन: आने से दागी शिक्षकों की उड़ी नींद
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। परिषदीय स्कूलों में फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षकों के खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी। स्पेशल टॉस्क फोर्स ने 30 से अधिक और ऐसे शिक्षकों की सूची बेसिक कार्यालय को सौंपी है। उधर, जांच टीम ने जिले के 50 और शिक्षकों को संदिग्ध सूची में डाला है। इसे मिलाकर यहां से 250 से अधिक शिक्षक ऐसे हैं, जिनके प्रमाण पत्रों की जांच एजेंसी कर रही है।
जिले में पिछले 10 सालों में हुई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत जमकर मनमानी की गई है। तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से नियुक्ति पटल से जुड़े बाबुओं ने अपने चहेतों को कूटरचित प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरियां दी हैं। सत्ता बदलने के बाद आई नई सरकार ने शिकायतों को देखते हुए एसटीएफ को इसकी जांच सौंपी। जैसे-जैसे जांच प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जिले के विभिन्न ब्लॉकों में अब तक 250 शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को संदिग्ध माना गया है। कई बार बीएसए कार्यालय आई एसटीएफ ने इनके अभिलेखों को प्राप्त कर अपने स्तर से बोर्ड व विश्वविद्यालयों में भेजकर इसका सत्यापन करा रही है। जांच एजेंसी ने हाल ही में 30 शिक्षकों की सूची बीएसए को सौंपी है। माना जा रहा है कि जल्द ही इन पर कार्रवाई हो सकती है।
शिक्षक संगठनों के नेताओं के रिश्तेदार भी हैं संदिग्ध
बेसिक शिक्षा से जुड़े शिक्षक संगठनों के कई प्रमुख पदाधिकारियों की पत्नियां भी संदिग्ध शिक्षकों की श्रेणी में हैं। कार्यालय तक अपनी पहुंच के दम पर कई पदाधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों की नियुक्तियां जिले में कराई हैं। इनमें उनकी पत्नी, बेटे, भाई, भाई की पत्नी, साली सहित अन्य रिश्तेदार भी शामिल हैं। विभागीय बाबुओं की पकड़ से इन्होंने कूटरचित ढंग से प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी हासिल की है। इस प्रकरण में डायट के बाबुओं की भूमिका भी संदिग्ध है। इनके खिलाफ भी अगर जांच हो तो फर्जी शिक्षकों की संख्या में अभी और बढ़ोत्तरी हो सकती है।
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जिले में अब तक 32 शिक्षक हो चुके हैं बर्खास्त
एसटीएफ व विभागीय जांच के बाद अब तक 32 शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। इसमें आधा दर्जन शिक्षक दूसरे के प्रमाण पत्रों पर नौकरी करते मिले। इनकी शिकायत मूल प्रमाण पत्र वाले शिक्षकों ने की थी। 11 शिक्षकों को वर्ष 2014 में हुई शिकायत के बाद पांच साल तक चली लंबी जांच के बाद बाहर का रास्ता दिखाया गया। इनमें से छह तो पिछले वर्ष मई में और बाकी पांच को पिछले माह में सेवा से बर्खास्त किया गया।
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जांच से दूर हैं गैर जिले से आए फर्जी शिक्षक
फर्जी शिक्षकों की पोल खुलने के बाद जहां यहां से गैर जनपद शिक्षक भागने की फिराक में हैं। वहीं, विगत 15 वर्षों के अंदर गैर जिलों से देवरिया में आए शिक्षकों की जांच कराई जाए तो 50 से अधिक फर्जी शिक्षकों का खुलासा हो सकता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इसमें कई ऐसे शिक्षक हैं जिनका नाम कुछ और है और नौकरी किसी और के नाम से कर रहे हैं। यहीं नहीं कुछ के पिता का नाम बदला हुआ है। कुछ अपने ही नाम के दूसरे व्यक्ति के सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहे हैं।
कोट
देवरिया जिले में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में जमकर खेल किया गया है। शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन में कई शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं। चिह्नित किए गए लोगों की सूची बीएसए को दी गई है।
-एसपी सिंह, एटीएफ गोरखपुर प्रभारी।