देवरिया। नगर और नगर पंचायतों में संचालित महिला स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियां करीब दो वर्षों से ठप जैसी हैं। डूडा में पंजीकृत 295 समूहों को लंबे समय से विभागीय सहायता नहीं मिली है।
सितंबर 2024 में पुरानी योजना बंद होने के बाद नई व्यवस्था का ड्राफ्ट जारी नहीं होने से समूहों की महिलाएं आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए परेशान हैं।
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए वर्ष 2015 में योजना शुरू की गई थी। इसके तहत नगर क्षेत्र और नगर पंचायतों में 295 समूह गठित कर डूडा में पंजीकृत किए गए।
इनमें करीब 60 प्रतिशत समूह सक्रिय रहे, जबकि बाकी निष्क्रिय हो गए। सक्रिय समूहों को तीन माह की गतिविधियां पूरी करने के बाद 15 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड मिलता था।
इस राशि से महिलाएं छोटे रोजगार शुरू करने या पहले से चल रहे काम को विस्तार देने में इसका इस्तेमाल करती थीं।
सितंबर 2024 में योजना बंद होने के बाद नई योजना लागू करने की बात सामने आई, लेकिन अब तक उसका ड्राफ्ट जारी नहीं हुआ। इससे समूहों को न आर्थिक सहायता मिल रही है और न ही विभागीय स्तर पर आगे की दिशा स्पष्ट है।
रिवॉल्विंग फंड बंद होने से उन महिलाओं के सामने भी काम बढ़ाने की चुनौती खड़ी हो गई है, जिन्होंने समूह के जरिये स्वरोजगार शुरू किया था।
समूहों के गठन का उद्देश्य महिलाओं को संगठित कर आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन सहायता रुकने से उनकी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।