देवरिया। मदनपुर थाना धू-धूकर जल रहा था। लाचार पुलिसवाले तमाशबीन बने थे। उपद्रवी थाने की बर्बादी की पटकथा लिख रहे थे। पुलिसकर्मियों की आंखों में बेबसी थी। तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी का नजारा छिपकर देख रहे थे। उपद्रवियों के आगे घुटने टेक चुकी पुलिस की मदद के लिए कोई आगे नहीं आया।
जान बचाने के लिए पुलिसकर्मी दीवार कूदकर भाग गए। भड़की भीड़ ने खाली पड़े पुलिस के बैरकों को आग के हवाले कर दिया गया। जिसमें नकदी, मोबाइल, कपड़े, चौकी, बिस्तर सहित अन्य सामान जलकर राख हो गए।
थाने में दो इंस्पेक्टर, सीओ सहित कई पुलिसकर्मी की जान दांव पर लगी थी। सब कुछ गंवाने के बाद जब हालात सामान्य हुए तो जिले के जिम्मेदार अधिकारी बोल पड़े कि जान बची तो लाखों पाए। वैसे भी जिले की पुलिस पहले भी कई बार मुंह की खा चुकी है।
अभी कुछ महीने पहले लारकांड की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि मदनपुर थाना जला दिया गया। पूरी घटना ने एक बार फिर जिले की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया।