देवरिया। पैकौली कुटी के पुजारी प्रयागदास की हत्या पुलिस के लिए अब सिर दर्द बनती जा रही है। इस हत्याकांड में सत्रह दिन बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। जबकि आईजी से लेकर शासन तक पूरे मामले में मॉनिटरिंग कर रहा है। उम्मीद के साथ पर्दाफाश में लगाए गए कई दिग्गज थानेदार को मुंह की खानी पड़ी हैं। बिहार से लेकर नेपाल तक की पुलिसिया पड़ताल खाक साबित हुई। हत्या में प्रयोग होने वाले चाकू के बारे में जानकारी मिली तो मंदिर के दूसरे नंबर के पुजारी शक के घेरे में आ गए। उनके रिश्तेदार और बेटे से कई दिनों तक पूछताछ हुई। संदेह के घेरे में आए अस्सी वर्षीय काशीनाथ मिश्र आठ दिनों से पुलिस की निगरानी में है। फिर भी हत्या की कड़ियां नहीं जुड़ पा रही है। जबकि सबसे अधिक शक के घेरे में काशीनाथ और उनके लोग हैं।
अगया गांव से पुलिस ने जिन लोगों को सबसे पहले उठाया था। उनसे तीसरी बार पूछताछ की जा रही है। ऐसे में इलाके के लोगों का कहना है कि पर्दाफाश में लगे पांच थानेदार और कई दर्जन सत्रह दिनों में क्या किए? मैनुअल मुखबिरी फेल हुई तो सर्विलांस भी दगा दे गई। करीब डेढ़ सौ से अधिक नंबरों को खंगाले जाने के बाद किसी निष्कर्ष पर पुलिस नहीं है। पड़ताल में अब भी यह बात अनसुलझी है कि कातिलों का मकसद लूटपाट था या पुजारी की हत्या करना। फिलहाल, जांच में देरी होने पर ब्लांइडमर्डर का राज गहरा होता जा रहा है। पुलिस की पड़ताल फिर नए सिरे पर आ गई है। शुक्रवार को पुलिस ने अगया गांव में एक पोखरे से पानी निकलवाना शुरू किया तो इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। पुलिस का दावा है कि अगर स्थानीय कातिल होंगे तो मूर्ति को छुपाएंगे। पड़ताल में मूर्ति नहीं मिलने से पुलिस के होश उड़े पड़े हैं। इसके लिए अब पोखरे से पुलिस पानी निकलवा रही है। हो सकता है कि मूर्ति किसी पोखरे में हो। 31 मई की सुबह मंदिर परिसर में पुजारी प्रयाग दास की लाश मिली थी। फिंगर प्रिंट लेने के बाद पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की। कई दिनों तक खाक छानने के बाद पुलिस अगया और दूसरे नंबर के पुजारी को जांच का केंद्र बिंदू बनाकर फिर से पड़ताल कर रही है।