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बेकाबू कार ने स्कूल जा रहीं तीन छात्राओं को कुचला, एक की मौत

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दुर्घटना के बाद मौके पर जुटे लोग। - फोटो : amar ujala
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देवरिया/रुद्रपुर। बेकाबू कार की चपेट में आने से पांचवीं कक्षा की छात्रा की मौत हो गई। हादसे में उसकी बहन समेत दो छात्राएं भी जख्मी हुईं हैं। दोनों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। छात्राओं को कुचलने के बाद कार ने टेंपो में भी टक्कर मारी। टेंपो दीवार पर गिरी। दीवार ढहने से एक महिला जख्मी हुई है। हादसा रुद्रपुर नगर स्थित एक स्कूल के पास हुई है। कार चालक फरार हो गया, लेकिन उसमें सवार दो लोगों को पकड़ लिया गया। पुलिस केस दर्ज कर कार्रवाई में जुटी है।
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गोरखपुर जिले के बड़हलगंज थानाक्षेत्र के डवनाडीह गांव निवासी रमायन यादव की बेटी काजल (12) अपनी ननिहाल रुद्रपुर थानाक्षेत्र के डहरौली गांव में रहकर चौराहे पर ही स्थित स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ती थी। वह रोज की तरह शुक्रवार की सुबह अपनी छोटी बहन आंचल के साथ स्कूल जा रही थी। नरायनपुर की ओर से तेज रफ्तार में कार रुद्रपुर की ओर आ रही थी। स्कूल से कुछ कदम पहले चौराहे पर अनियंत्रित हुई कार ने स्कूल जा रही गांव के मनोज यादव की बेटी लक्ष्मी को टक्कर मार दी। कार से टकरा कर वह दूर जा गिरी। अनियंत्रित कार ने काजल और उसकी बहन आंचल को भी चपेट में ले लिया। काजल के सिर में गंभीर चोट लगने से घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। आंचल और लक्ष्मी को गंभीर चोट आई। दोनों को गांव के लोग अस्पताल ले गए। यहां से लक्ष्मी को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लक्ष्मी और आंचल पहली कक्षा की छात्रा हैं। लड़कियों को कुचलते हुए कार बगल में खड़ी टेंपो से टकराई। टक्कर इतनी जोरदार हुई की टेंपो उछलकर दीवार से टकरा गई। दीवार ढहने से एक महिला को भी चोट आई। वहीं, टेंपो के परखचे उड़ गए। गुस्साए लोगों ने कार में सवार पांच लोगों में से दो को दबोच लिया। चालक सहित तीन लोग भाग निकले। पुलिस मृत छात्रा के नाना अंबिका यादव की तहरीर पर वाहन चालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर जांच कर रही है। 

इनसेट में
काफूर हो गया बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना
रुद्रपुर। बड़हलगंज थाना के डवनाडीह गांव की रहने वाली लक्ष्मी पढ़-लिखकर कुछ बनने के लिए ननिहाल आई थी। उसकी मौत के बाद माता-पिता का बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना काफूर हो गया। अस्पताल पहुंची मां फूलमती दहाड़ें मारकर रो रही थी। उसकी सबसे होनहार बेटी लक्ष्मी सड़क हादसे का शिकार हो गई। पिता रमायन बंगलूरू में रहकर कमाते हैं। उन्होंने दोनों बेटियों की अच्छी पढ़ाई के लिए ननिहाल डहरौली भेजा था। छोटे बेटे आनंद और आंचल के साथ मां भी मायके में रह कर बच्चों को पढ़ा रही थी। रोज सुबह बच्चों को तैयार कर स्कूल भेजना और उनकी शिक्षा पर ध्यान देने के लिए वह लोग गांव छोड़कर आए थे। बड़ी बेटी काफी प्रतिभावान थी। उसके प्रतिभा को पहचानकर माता-पिता उसे डॉक्टर बनाने का सपना पाल लिए। स्कूल में लक्ष्मी अपनी कक्षा में सबसे तेज थी। दुर्घटना में उसकी मौत से स्कूल के शिक्षक और बच्चे रो रहे थे।
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