देवरिया में खाकी पहन कर विभाग के साथ दगाबाजी करने वाले कुछ बंदी रक्षक जल्द ही बेनकाब हो जाएंगे। जेल में हुए बवाल की पड़ताल कर रहे डीआईजी जेल ने चार बंदी रक्षकों की भूमिका पर संदेह जताया है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि चारों बंदी रक्षक जेल में उत्पात मचाने वाले बदमाशों के करीबी रहे है। निजी स्वार्थ के कारण बंदी रक्षकों ने अपने ही अधिकारी के खिलाफ गोपनीय तरीके से मोर्चा खोल रखा था। जिसने बवाल बढ़ाने में घी का काम किया। जेल के हालात सामान्य होने के बाद चारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
डीआईजी की प्रारंभिक पड़ताल में विवाद की वजह जेल में सुविधा को लेकर राइटर की पिटाई बताया गया है। दूसरे जेलों में उत्पात मचाने के बाद जिला कारागार में आए सात बदमाश जेल में वर्चश्व कायम करना चाहते थे। उन्होंने सुविधा को लेकर कुछ बंदी रक्षकों से संपर्क साध रखा था। सूत्रों की माने तो जेल अधीक्षक रंग बहादुर पटेल के खिलाफ उनके ही बंदी रक्षक साजिश कर रहे थे। वह लगातार दुर्दांत बदमाशों को जेल अधीक्षक के खिलाफ भड़का रहे थे। इसके अलावा जेल में मोबाइल, कैंटीन सहित अन्य सुविधाओं को लेकर लगातार अन्य बंदियों को भी उसका रहे थे।
नतीजा विद्रोह की आग सोमवार को भड़क गई। राइटर धवंतरी की पिटाई के बाद अधीक्षक की सख्ती भारी पड़ी और जेल जल उठा। पूरे प्रकरण की जांच में डीआईजी ने सैकड़ों बंदियों, बंदी रक्षकों से अलग-अलग बात की। डीआईजी की पड़ताल में चार बंदी रक्षकों की भूमिका संदेह के घेरे में रही। इसके अलावा कुछ राइटर भी अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। तो कुछ की ड्यूटी बार-बार एक ही जगह पर लगाई जा रही थी। इससे कई बंदी नाखुश थे। जो विवाद की बड़ी वजह बन गई। कटघरे में आने के बार बंदी रक्षकों के होश उड़ गए है। उन पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।