शहीद सैनिक सत्य नारायण यादव की फाइल फोटो।
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देवरिया। रविवार को बांसपार बैदा गांव के लोग नींद से जागे भी नहीं थे कि सत्यनारायण यादव के शहादत की खबर पहुंच गई। खबर सुनते ही जो जहां था, वहीं से शहीद के घर की ओर दौड़ पड़ा। आस-पास के गांवों से भी लोग सरहद पर शहीद हुए सपूत के घर वालों को ढांढस बंधाने पहुंचे थे। गांव के लाल की शहादत पर लोग फख्र कर रहे थे, मगर आतंकी हमले को लेकर उनके दिल में गुस्सा था। सबकी निगाहें अब शहीद के अंतिम दर्शन के लिए टिकी हुई हैं। सोमवार की सुबह तक पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा।
सदर कोतवाली क्षेत्र के बांसपार बैदा निवासी अयोध्या यादव के एकलौते पुत्र सत्यनारायण यादव करीब 30 वर्ष पहले बीएसएफ में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। करगिल युद्ध के समय भी वह सीमा पर तैनात रहे। तब भी वह बहादुरी से लड़े थे। उनके दांए कंधे पर गोली लगी थी। उनकी बहादुरी के कारण ही एएसआई के पद पर पदोन्नति दी गई थी। इन दिनों उनकी तैनाती अखनूर सेक्टर में थी। शनिवार की रात हुए आतंकी हमले में बुरी तरह जख्मी सत्यनारायण की देर रात मौत हो गई। सुबह करीब साढ़े छह बजे पत्नी सुशीला देवी के मोबाइल पर यह खबर आई तो घर में कोहराम मच गया। घर में मौजूद पत्नी और पिता अयोध्या यादव सहित परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। सदर एसडीएम राकेश सिंह, सीओ सीताराम ने शहीद के घर पहुंचकर ढांढस बंधाया। पिता अयोध्या यादव के मुताबिक शव देर रात लखनऊ आएगा, इसके बाद गोरखपुर होते हुए सुबह तक घर लाया जाएगा।