भाटपाररानी। पूर्व माध्यमिक विद्यालय बौलिया पांडेय में तीन अप्रैल को मिड-डे मील के दौरान बच्चों के बीच मारपीट हुई थी। धक्कामुक्की में गंभीर चोट लगने से छात्रा के छोटे भाई (कक्षा-6) के छात्र की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने बौलिया पांडेय गांव निवासी एक छात्र को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया था। बताते हैं कि भाई की मौत के बाद से ही छात्रा काफी व्यथित थी। सामान्य रूप से शांत स्वभाव की छात्रा में चिड़चिड़ापन आ गया था। साथियों से बातचीत में अक्सर वह भाई की मौत का बदला लेने का जिक्र करती थी। मंगलवार को भी मिड-डे मील में विषाक्त पदार्थ मिलाने के शक में उसे पकड़ गया तो वह बदले की बात कहती रही। विद्यालय में मौजूद बच्चों और अध्यापकों की मानें तो छात्रा कह रही कि ‘हमरे भाई के बदला लेवे के बाद, हमे सबके मुआइब।’ हैंडपंप में त डालेब भुलाई गईलीं...। हालांकि जब स्कूल परिसर में ग्रामीणों की भीड़ जुटनी शुरू हुई तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। मां के पहुंचने के बाद वह विषाक्त पदार्थ मिलाने से साफ तौर पर इन्कार करने लगी। छात्रा की मां भी दावा करती रही कि शांत स्वभाव वाली उसकी बेटी, ऐसा नहीं कर सकती। इसे लेकर ग्रामीणों से उसकी तीखी झड़प भी हुई। कुछ ग्रामीणों के गुस्से का कोपभाजन भी बनना पड़ा। संयोग था कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाल ली। घटना को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है। उनका कहना था कि अगर यह भोजन खा लेते तो बड़ी अनहोनी तय थी।
देर से पहुंची खाद्य सुरक्षा की टीम, शिक्षकों से झड़प
मिड-डे मील का मीनू रजिस्टर चेक करने पर भड़के शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
भाटपाररानी। मिड-डे मील में विषाक्त पदार्थ के मिलावट की सूचना के तीन घंटे बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची। विद्यालय में आते ही टीम मीनू रजिस्टर चेक करने लगी। प्रधानाध्यापक समेत अन्य शिक्षकों से मिड-डे मील के मीनू को लेकर सवाल-जवाब करने लगी। इस पर विद्यालय में जुटे शिक्षक संघ के पदाधिकारी भड़क गए। पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामाजी यादव, विंध्याचल यादव, प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष उमेश दीक्षित, कमलेश कुमार आदि का कहना था कि टीम का दायित्व भोजन की गुणवत्ता चेक करना है। मिड-डे मील में क्या मिलाया गया है, इसके लिए वह सैंपल लेकर जांच करे, बेतुके सवाल न पूछे। खाद्य सुरक्षा टीम और शिक्षक नेताओं में जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई। नौबत हाथापाई तक भी पहुंची, लेकिन ग्राम प्रधान इंद्रासन यादव और ग्रामीणों ने बीचबचाव कर मामला शांत कराया। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप श्रीवास्तव, अर्जुन त्रिपाठी, सुरेश कुमार, मनीष मल्ल शामिल रहे। उन्होंने बताया कि दाल का सैंपल लेकर जांच को भेजा गया है। दुर्गंध और रंग से आशंका है कि कोई कीटनाशक मिलाया गया है। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने पर ही कुछ कहा जा सकता है।
मौके पर पहुंचे प्रभारी बीएसए, की पूछताछ
घटना की जानकारी मिलते ही प्रभारी बीएसए प्रभात श्रीवास्तव विद्यालय पहुंच गए। प्रधानाध्यापक, रसोइया व अन्य लोगों से पूरे प्रकरण की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि सिर्फ 15 बच्चे भोजन करने के लिए बाकी थे। मिलावट की बात पता चलते ही उन्हें भोजन नहीं दिया गया। आठवीं की छात्रा को मौके से पकड़ा गया है। उसके हाथ से दुर्गंध भी आ रहा था। परिस्थितियों से प्रथम दृष्टया यही स्पष्ट हो रहा है कि उसी ने भोजन में कुछ मिलाया है। प्रधानाध्यापक को तहरीर देने के लिए निर्देशित किया गया है। उधर, प्रभारी बीईओ अनिल चौबे ने भी मौके पर पहुंचकर छानबीन की। बनकटा पीएचसी के प्रभारी डॉ. बीएन यादव भी पहुंचे।
अनहोनी की आशंका से सहमे अभिभावक
घटना की जानकारी मिलते ही सैकड़ों की तादाद में अभिभावक विद्यालय पहुंच गए। उनमें अपने बच्चों की खैरियत जानने की बेचैनी दिखी। महिलाएं अपने बच्चों से पूछ रही थीं कि खाना खइले बाड़ कि नइखअ खइले। बच्चों के चेहरों पर दहशत दिख रही थी तो अभिभावक भी सहमे हुए थे। वह बार-बार भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे थे तो छात्रा को कोसते भी नजर आए।
स्कूल प्रशासन की लापरवाही उजागर
तीन अप्रैल को स्कूल परिसर में ही मारपीट के दौरान हुई छात्र की मौत की घटना के बाद भी जिम्मेदारों ने कोई सबक नहीं लिया। उनकी लापरवाही और गैर जिम्मेदारी के चलते ही मंगलवार की घटना हो गई। मिड-डे मील में विषाक्त पदार्थ मिलाने वाली छात्रा हो या कोई और, लापरवाही स्कूल प्रशासन की ही है। बताते हैं कि विद्यालय की बाउंड्री नहीं है। ऐसे में हमेशा असुरक्षा का भय बना रहता है। पिछली घटना के बाद ही अफसरों ने बाउंड्री निर्माण की जरूरत बताई थी, मगर आज तक एक भी ईंट नहीं रखी जा सकी।
बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन समझें अभिभावक
पं. दीनदयाल यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुषमा पांडेय ने बताया कि घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। 12 से 18 वर्ष की अवस्था बहुत उथल-पुथल की होती है। ऐसी अवस्था में अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। विशेषकर अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन को समझें और उन्हें अपने अंदर की बातों को कहने के लिए प्रेरित करें। वहीं मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज में बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. शक्ति सिंह कहते हैं कि इस दौर में बच्चों के व्यवहार में इतनी तेजी से परिवर्तन होता है कि सही गलत का अंतर नहीं कर पाते। ऐसे में स्कूलों में काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
घटना के संबंध में प्रधानाध्यापक भृगुनाथ प्रसाद ने नामजद तहरीर दी है। पूछताछ में छात्रा कुछ भी मिलाने से इन्कार कर रही है। मामला संदेहास्पद लग रहा है। हर पहलू पर जांच की जा रही है। छानबीन के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। -देवेंद्र सिंह यादव, एसओ बनकटा।