देवरिया। पैकौली कुटी के पुजारी की हत्या आस्था पर चोट के अलावा विश्वासघात की ओर इशारा कर रही है। हत्या में शामिल शातिरों ने पहले पुजारी को भरोसे में लिया फिर घटना को अंजाम दिया। बदमाशों की नीयत हत्या करने की थी या लूटपाट, पुलिस इस असमंजस में फंसी है। पड़ताल में एसपी हत्या और लूट के दोनों बिंदुओं को अलग से जांच कराने की बात कह रहे हैं। मौके पर मिले नए चाकू का प्रयोग इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि बदमाशों ने पूरी तैयारी के साथ कत्ल की नीयत से आए थे। हो सकता है कि पुलिस को गुमराह करने के लिए लूटपाट की घटना को अंजाम दिया हो।
यह भी बात सामने आ रही है कि कहीं चाभी चुराते समय पहचाने जाने के डर से बदमाशों ने उनकी हत्या न कर दी हो। पुलिस की पड़ताल में एक बात साफ हो गई है कि कातिल कोई करीबी है, जो मंदिर की हर गतिविधियों और गलियों से वाकिफ है। मंदिर की बनावट और बाहर जाने का रास्ता कम ही लोगों का मालूम है। सूत्रों की मानें तो शातिर बदमाश पुजारी की गतिविधियों को जानने के बाद बाहर के रास्ते अंदर मंदिर में प्रवेश किए और घटना को अंजाम देने के बाद मुख्य दरवाजे से न जाकर उस रास्ते का प्रयोग किया, जिसे बाहरी लोग नहीं जानते हैं। अंदर से दरवाजे का बंद रहना काफी सुरक्षित था। लोगों को यह पता था कि मंदिर में पुजारी के अलावा इस समय कोई नहीं सो रहा है। जबकि चार दिन पहले मंदिर में एक अन्य साधू काशीनाथ मिश्रा भी सोते थे। पुलिस घटना की कड़ियों को जोड़ रही है। संदेह के घेरे में सबसे अधिक करीबी लोग ही आ रहे हैं। एसपी प्रभाकर चौधरी कहना है कि सिर्फ हत्या हैं या लूटपाट की नीयत में हत्या हुई है। इन दोनों बिंदुओं पर पड़ताल कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में कातिल का मेन मोटिव हत्या और लूट की तरफ इशारा कर रहा है।
संदेह के घेरे में पैकौली कूटी के करीबी
अरबों की संपत्ति पर कई लोगों की नजर है यह बात किसी से छिपी नहीं है। भगवान की संपत्ति को लेकर कई लोगों ने दिमाग लगा रखा है। एसपी प्रभाकर चौधरी ने गोसाई ओमप्रकाश गिरी, कुटी प्रबंधक अंगद तिवारी, पुजारी काशीनाथ मिश्र, कतलू बाबा और शंकर से पूछताछ की। पड़ताल में पता चला कि ओमप्रकाश गिरी मंदिर के बाहर कीर्तन करा रहे थे। रात करीब 11 बजे तक उनके पास कई लोग मौजूद थे। पड़ताल में पता चला कि कतलू बाबा मंदिर की खेती कराते हैं। उन्होंने साधू काशीनाथ मिश्र को दो दिन पहले मंदिर परिसर में सोने से मना कर दिया। वह मृतक के पास सोते थे। कतलू बाबा का तर्क था कि मंदिर से सामान चोरी हो रहे हैं, ऐसे में काशीनाथ को बाहर सोना चाहिए। मंदिर में काम करने वाले करीब एक दर्जन कर्मचारियों के साथ ही कई बच्चों से पुलिस ने पूछताछ की। संदेह के घेरे में बागीचा खरीदने वाला भी है।
मंदिर के बगीचे में दावत की चर्चा
सूत्रों की मानें तो रविवार को मंदिर परिसर के बगीचे में दावत का आयोजन किया गया था। चार लोग दावत में शामिल हुए। इसमें दो लोगों बाहरी लग रहे थे। दावत का आयोजन उस व्यक्ति ने किया था जो बगीचा खरीद रखा है। मामला प्रकाश में आने के बाद चौकी प्रभारी बैतालपुर ने उससे पूछताछ की। एसपी ने भी बगीचा खरीदने वाले संदिग्ध का काल डिटेल मांगी है। चर्चा है कि दावत का आयोजन करने वाले लोग पुजारी के करीबी थे।
भंडारा भोग के बाद बंद हुआ कपाट
सोमवार की रात नौ बजे के करीब आरती के बाद मंदिर को बंद कर दिया गया। रात 10 बजे के करीब भंडाराभोग के बाद पुजारी सहित अन्य लोग सोने चले गए। सुबह पुजारी के हत्या की खबर से लोग हैरान थे। किसी को घटना पर यकीन नहीं हो रहा था। मंगलवार को राजराजेश्वर का पूजापाठ नहीं हो सका।
दर्जन भर नंबरों को पुलिस ने लिया सर्विलांस पर
वारदात के बाद पुलिस हत्या के खुलासे में जुट गई। मंदिर से जुड़े दर्जन भर लोगों का मोबाइल नंबर पुलिस ने सर्विलांस पर लगा दिया है। जबकि हत्या के बाद मंदिर परिसर में पड़े पुजारी प्रयाग दास का मोबाइल भी सर्विलांस पर लगाया गया है। पुलिस मोबाइल के जरिए बदमाशों की तलाश में जुटी है। सूत्रों का कहना है कि घटना का राज मोबाइल ही खोल सकता है।
डीआईजी ने मौके का किया निरीक्षण
रेंज के डीआईजी शिवसागर ने मौका-ए-वारदात का निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों के विरोध के कारण पुलिस की जांच प्रभावित हुई। डीआईजी ने खुलासे के लिए कई टीम बनने और तत्काल पर्दाफाश की बात कही।