देवरिया। दिनभर चली मान-मनव्वल और कभी हां, कभी ना के बाद आखिरकार शाम को डीएम के आश्वासन के बाद सरौरा कांड में मारे गए तीनों युवकों का अंतिम संस्कार सोमवार की शाम गांव के पास कुर्ना नाले के किनारे कर दिया गया। इस दौरान बड़ी दाताद में इलाके के लोगों के साथ ही पुलिस और प्रशासनिक अमले के लोग भी मौजूद रहे।
पोस्टमार्टम के बाद रविवार की साढ़े सात बजे तीनों शव पुलिस की सुरक्षा में सरौरा गांव पहुंचे। प्रशासन के लोग चाह रहे थे कि रात को ही शवों को जला दिया जाए, लेकिन गांव के लोग तैयार नहीं थे। ग्राम प्रधान के घर के बगल में एक खेत में तीनों शवों को बर्फ की सिल्ली पर रखा गया था।
आधी रात को डीएम सुजीत कुमार और एसपी राकेश शंकर मौके पर पहुंचे। गांववालों की काफी मान-मनौव्वल की, लेकिन गांववाले नहीं माने। गांववालों ने सुबह सात बजे शव जलाने की बात कही। इस पर रात एक बजे दोनों अधिकारी मुख्यालय लौट आए। सोमवार की सुबह ही यहां पुलिस के 300 से अधिक जवान, पीएसी और महिला कांस्टेबल पहुंच गईं। सीआरओ मनोज, एएसपी सुरेंद्र बहादुर, एसडीएम सदर राकेश सिंह, बरहज एसडीएम अरुण सिंह, डीपीआरओ एसपी सिंह, सभी सर्किल के सीओ भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने कई बार गांववालों से बात कर उन्हें अंतिम संस्कार के लिए मनाने की कोशिशें कीं, पर लोग सीएम योगी को बुलाने की बात पर अड़ गए।
कुछ देर बाद तेवर थोड़े नर पड़े, तो बात सीएम के से घटकर डीएम को बुलाने पर आ गई।मौके पर मौजूद अधिकारियों ने डीएम सुजीत कुमार को हालात से अवगत कराया। काफी देर तक डीएम की ओर से कोई जवाब नहीं आया। बाद में सूचना आई कि जब शव उठाकर चौराहे पर लाया जाएगा तो वह आएंगे। इस पर गांववाले राजी हो गए। साढ़े तीन बजे तीनों शवों को गांववालों ने कंधा देकर देवरिया-रुद्रपुर रोड पर पहुंचाया। यहां कुछ देर तक शव रखा गया था। सूचना मिली कि जिलाधिकारी पहुंच रहे हैं तो गांव के लोग शव लेकर कुर्ना नाला के घाट पर पहुंच गए। वहां डीएम सुजीत कुमार और एसपी राकेश शंकर पहुंचे।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख विजय प्रताप यादव की अगुवाई में गांववालों ने उन्हें ज्ञापन दिया। इस पर डीएम ने आश्वासन दिया कि गांव में यदि आबादी की जमीन होगी तो पीड़ित परिवार को पट्टा करा देंगे। आवास भी दिया जाएगा, पेंशन मंजूर करा दी जाएगी। जिले के कोष से अनुदान दे दिया जाएगा। शेष मांगों के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। घाट पर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अधिक संख्या में फोर्स तैनात थी। शवों के अंतिम संस्कार के बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने राहत की सांस ली।