बरहज। दिग्विजय सिंह के साथ जो हादसा हुआ उसे लोग नियति का क्रूर मजाक मान रहे हैं। यूपी पुलिस में उपनिरीक्षक रहे पिता नर्मदा सिंह की वर्ष 2008 में मार्ग दुर्घटना में मौत हुई थी, वे गोरखपुर जिले में तैनात थे। पिता की मौत के बाद विभाग ने दिग्विजय सिंह को मृतक आश्रित के रुप में विभाग में उपनिरीक्षक बनाया था।
गोरखपुर के एमजी कॉलेज से रसायनशास्त्र से एमएसी किए दिग्विजय सिंह नर्मदा सिंह की की दूसरी संतान थे। बडे़ भाई रिंकू सिंह गांव डेहरी रहते हैं। इनके मां सुशीला देवी की भी मौत 2009 में हो गई। चार वर्ष पूर्व इन्हें पिता की जगह नौकरी मिली। दिग्विजय की पत्नी अर्चना के साथ जो कुछ हुआ उसे सोच कर हर कोई रो रहा है।
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दिग्विजय का विवाह पिछले वर्ष एक मई को सलेमपुर के रामपुर गांव में भूपेंद्र सिंह की बेटी से हुआ था। विवाह के बाद से ही अर्चना अपने पति के साथ ही रहती थीं। उन्हें उम्मीद भी नही थी कि वे अचानक अपने पति को 16 माह बाद खो देगीं। अर्चना आठ माह से गर्भवती हैं। गर्भ में पल रही संतान के भविष्य को लेकर परिवार के लोग चिंतित हैं।
दिग्विजय की मौत की जानकारी मिलते ही दिग्विजय के बड़े भाई रिंकू सिंह के साथ घर के अन्य लोग एटा रवाना हो गए। दिग्विजय के पैत्रिक घर के दरवाजे पर ताला लटका रहा। पड़ोस के परिवार में रिश्तेदार के साथ गांव के लोग पूरे दिनभर गुमसुम बैठे रहे। गांव का हर कोई घटना को लेकर काफी दुखी था।