देवरिया जेल में अतिरिक्त सुविधा और छूट को लेकर बंदियों के दो गुटों के विवाद ने मंगलवार सुबह देखते-देखते बड़े बवाल की शक्ल ले ली। जेल अधीक्षक के लिए मुखबिरी करने का आरोप लगाकर कुछ बंदियों ने जेल राइटर (सजायाफ्ता बंदी) को पीट दिया। जेल अधीक्षक रंगबहादुर पटेल ने बंदियों पर दबाव बनाया तो वे उग्र हो गए और हमलावर तेवर से उन्हें दौड़ा लिया। यही नहीं बंदियों ने चार बैरकों में तोड़फोड़ करते हुए पथराव शुरू कर दिया।
मेस में मौजूद गैस सिलिंडरों को कब्जे में लेकर जेल में आग लगा दी। बंदियों को समझाने और संभालने की नीयत से फोर्स के साथ जेल में दाखिल हुए एसपी प्रभाकर चौधरी पर भी बंदी हमलावर हो गए। बवाली हालात में घिरकर एसपी प्रभाकर चौधरी, एएसपी नरेन्द्र कुमार सिंह, सीओ सुशील सिंह सहित 30 पुलिस वाले जख्मी हुए हैं। हालात काबू करने के लिए फोर्स को लाठीचार्ज, आंसू गैस, पानी की बौछार के बाद फायरिंग की भी करनी पड़ी। हालांकि डीएम ने डीएम ने पुलिस फायरिंग से इन्कार करते हुए रबर की गोलियां चलाए जाने की बात कही है। करीब चार घंटे बाद स्थितियां नियंत्रण में आईं।
डीएम अनीता श्रीवास्तव ने बताया कि पता चला है कि सोमवार को अदालत की पेशी से लौटते समय एक बंदी अपने हाथ पर चढ़े प्लास्टर में छिपाकर नशीला पदार्थ जेल के भीतर ले आया था। भीतर की व्यवस्था में सहयोग करने वाले पुराने सजायाफ्ता बंदी (जेल राइटर) को इसकी भनक लगी तो उसने जेल अधीक्षक को जानकारी दी। इसका अंदाजा हो जाने से गुस्साए बंदियों के एकगुट ने राइटर की पिटाई कर दी। दूसरी ओर चर्चा यह भी है कि जेल के अंदर मोबाइल फोन की बैट्री मिलने की जानकारी राइटर ने जेल अधीक्षक को दी थी, जिस पर उसे पीट दिया गया।
राइटर की भूमिका को लेकर बंदी दो गुटों में बंट गए। मंगलवार की सुबह आठ बजे परेड के दौरान जेल अधीक्षक ने जेल के भीतर प्रतिबंधित चीजें मिलने को लेकर बंदियों से सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी। साथ ही राइटर के प्रति खराब रवैये वालों से कठोरता से पेश आने की बात भी कही। इसकी प्रतिक्रिया में राइटर विरोधी बंदियों का गुट भड़क गया और जेल अधीक्षक को दौड़ा लिया।
इसके बाद देखते-देखते स्थिति अराजक होती चली गई। तोड़फोड़, पथराव, आगजनी देख आला अफसरों के साथ कई थानों की फोर्स और फायर ब्रिगेड जेल में दाखिल हुई। चार घंटे के संघर्षपूर्ण माहौल के बाद शाम को स्थिति सामान्य हो सकी। जेल में तनाव के मद्देनजर पीएसी के साथ अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है।
सुबह से शाम तक जेल के बवाली हालात से जूझने के बाद पुलिस ने कारागार प्रशासन की तहरीर पर बंदी शाह आलम, दिनेश जायसवाल, सनी मिश्रा, विजय बहादुर सिंह सहित 17 को नामजद करते हुए 250 बंदियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनके खिलाफ बलवा, हमला, आगजनी, तोड़फोड़, सरकारी काम में बाधा, सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाना. सरकारी कर्मचारियों से अभद्रता, मारपीट जैसी गंभीर धाराओं का इस्तेमाल किया गया है।