देवरिया। शराब के धंधे में दस लाख रुपये रिश्वत लेने की पुष्टि होने पर क्राइम ब्रांच सीआईयू प्रभारी रहे उप निरीक्षक विकास यादव सहित पांच पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज कराया गया है। हिरंदपुर में पकड़ी गई शराब के केस में इन पुलिसवालों का नाम शामिल कर लिया गया है। मुकदमे में नाम आने के बाद पूरे महकमे में खलबली मच गई है।
रामपुर कारखाना, हिरंदपुर में बंद राइस मिल से पुलिस ने 92 ड्रम सांद्र अल्कोहल बरामद किया था। मालिक रविंद्र जायसवाल सहित दो को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने पूछताछ के दौरान बताया कि शराब के धंधे में क्राइम ब्रांच की संलिप्तता है।
उन्होंने सेफ्टी मनी के रुप में दस लाख रुपये लिए है। एसपी प्रभाकर चौधरी ने जब आरोपियों की पड़ताल शुरू की तो पूरी टीम रविंद्र जायसवाल के साथ एक होटल में मीटिंग करते पकड़ी गई।
सीसीटीवी में दोनों की वार्ता भी एसपी तक पहुंच गई। उन्होंने मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक को सौंप दिया। आरोप लगते ही एसपी ने क्राइम ब्रांच प्रभारी उप निरीक्षक विकास यादव, सिपाही विनय वर्मा, योगेंद्र, घनश्याम सिंह और रवि श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया। सभी की बर्खास्तगी के लिए शासन में रिपोर्ट भी चली गई।
एसपी प्रभाकर चौधरी के निर्देश के बाद रामपुर कारखाना थाने में दर्ज शराब कारोबारियों के केस में इन पुलिसकर्मियों को शामिल कर लिया गया। इस बाबत विवेचना अधिकारी, डॉ. अजय प्रताप सिंह ने बताया प्रथम दृष्टया जांच में इन पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पाई गई है। संबंधित केस में भ्रष्टाचार की धारा को जोड़कर दरोगा सहित चार पुलिसवालों का नाम शामिल कर लिया गया है।