देवरिया। सीबीआई टीम ने चौथे दिन जिला जेल पहुंचकर माफिया अतीक अहमद के साथ बंद रहे लोगों से पूछताछ कर जानकारी ली। कुछ बंदी तो रिहा हो गए हैं, लेकिन बचे हुए बंदियों से पूछताछ कर माफिया अतीक की करतूतों की जानकारी ली गई। देर शाम तक सीबीआई जिला जेल में जमी रही।
जिला जेल में बंद रहे माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद के गुर्गों ने लखनऊ के रियल स्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल का 26 दिसंबर को अपहरण कर लिया था। जिला जेल के बैरक नंबर सात में उसकी जमकर पिटाई की गई। 43 करोड़ की संपत्ति के कागजात पर हस्ताक्षर करा लिए गग। लखनऊ पहुंचकर कृष्णानगर थाने में मोहित जायसवाल ने केस दर्ज कराया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की जांच सीबीआई कर रही है। 12 जून को सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया और 20 जून की शाम जिले में आ गई। पहले दिन जेल पहुंचकर जांच की, दूसरे दिन पूर्व जेल अधीक्षक समेत कई अधिकारियों से पूछताछ की गई। तीसरे दिन सीबीआई टीम ने बंदीरक्षकों से पूछताछ की। यहां से स्थानांतरित होकर गए बंदीरक्षकों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। चौथे दिन रविवार की सुबह सीबीआई टीम जिला जेल की बैरक नंबर सात में पहुंची। माफिया अतीक अहमद के साथ इस बैरक में रहने वाले लोगों से सीबीआई टीम ने गहनता से पूछताछ की। सभी को अलग-अलग बुलाकर जानकारी ली गई। दिन भर एक-एक बंदी को बुलाकर अतीक के बारे में जानकारी ली गई। उसके साथ के कुछ बंदी जमानत पर रिहा हो गए हैं। उनके बारे में भी सीबीआई टीम जानकारी जुटा रही है। देर शाम तक सीबीआई टीम जिला जेल में अतीक के कारनामों के बारे में जानकारी जुटा रही थी। चर्चा होने लगी है कि इस बार अतीक अहमद बन नहीं पाएगा। सीबीआई उस पर शिकंजा जरूर कस देगी।
जेल में होती थी पार्टी, उड़ाते थे दावत
देवरिया। माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद की जेल में भी मौज ही रहती थी। जेल में आएदिन पार्टी होती और दावत उड़ाई जाती थी। सीबीआई की अब तक जांच में इस बात की पुष्टि हो रही है। जेल में सीबीआई टीम को मुर्गों की हड्डियां मिलीं हैं। इससे स्पष्ट हो गया है कि जेल में मांसाहार चलता था।
अप्रैल 2017 में प्रयागराज के नैनी जेल से माफिया अतीक अहमद देवरिया जेल में शिफ्ट हुआ। पहले दिन से ही वह यहां मनमानी करने लगा था। उसकी मनमानी को रोकना जेल अधिकारियों के वश की बात नहीं थी। वह जो चाहता, जैसे चाहता, करता था। रोकने की कोशिश करने वालों को आंख तरेर देता तो भाग जाते थे। बताया तो यह भी जाता है कि वह जेल अधीक्षक की कुर्सी पर बैठ जाता था। डर की वजह जेल अधीक्षक कुछ कह नहीं पाते थे। जेल में वह दरबार भी सजाता था। उससे मिलने वाले बेरोक-टोक जेल में जाते थे। उनके मिलने वाले जितनी देर चाहे जेल में उससे बातचीत कर लेते थे। जेल में अतीक की दावत भी खूब होती थी। ईद में सेवईं तो बकरीद में मांसाहारी भोजन अतीक ही बनवाता था। उस दिन जेल के सभी बंदी अतीक का बनवाया हुआ भोजन ही करते थे। इसके अतिरिक्त भी वह जब चाहता जेल में ही दावत बन जाती थी। अन्य दिनों में वह बाहर से बनाकर लाया गया भोजन ही करता था। सीबीआई ने गहनता से जेल के अंदर जांच की तो मुर्गे की फेंकीं र्हुइं हड्डियां मिलीं हैं। इससे सीबीआई टीम को विश्वास हो गया है कि जेल में दावत उड़ाई जाती थी और वह जमकर मनमानी करता था।