चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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देवरिया। फर्जी कागजातों के आधार पर शिक्षक पद पर नियुक्ति मामले में बरी किए गए तत्कालीन बीएसए एएन मौर्य को अपर जिला जज ने दोषी करार दिया है।
तत्कालीन बीएसए को बरी किए जाने संबंधी अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को निरस्त करते हुए अपर जिला जज ने उनके खिलाफ कार्रवाई का आदेश पारित किया है। अधीनस्थ न्यायालय को आदेश दिया है कि सरकार से संस्तुति प्राप्त करने के लिए वादी को अवसर प्रदान करने का अधिकार दिया जाय। मामला दुलहिन कन्या जूनियर हाई स्कूल अहिरौली लाला से जुड़ा हुआ है।
इसमें दमयंती यादव की शिक्षक पद पर नियुक्ति 2009 में हुई थी। स्कूल के लिपिक दहारी प्रसाद ने दमयंती देवी, प्रबंधक रमायन यादव, तत्कालीन बीएसए एएन मौर्य के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। अधीनस्थ न्यायालय मेें बीएसए ने धारा 197 सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र दिया था। उन्होंने कहा था कि वह सरकारी कर्मचारी हैं। सरकारी कर्मचारी पर आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता है।
मजिस्ट्रेट न्यायालय ने उनके प्रार्थना पत्र को 21 मार्च को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि एएन मौर्य पर मुकदमा नहीं चल सकता है, क्योंकि वादी ने सरकार सेे मुकदमा चलाने के लिए कोई अनुमति नहीं लिया है।
सरकारी वकील ने तर्क दिया कि लोकसेवक के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया गया है। ऐसे मामले में मुकदमा चलाने के लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। अपर जिला जज अरविंद कुमार ने सरकार की तरफ से दाखिल निगरानी को स्वीकार करते हुए तत्कालीन बीएसए को बरी करने का आदेश निरस्त कर दिया।