देवरिया में रंजिश में एक परिवार का पूरा कुनबा ही उजड़ गया। डबल मर्डर से पूरा इलाका थर्रा उठा है। कातिलों ने फुलवरिया करन में दोनों भाइयों के खून से जो होली खेली उसे आसानी से भुलाया नहीं जा सकता है।
मामूली विवाद में बेरहम होकर सगे दो भाइयों का कत्ल करने का बड़ा फैसला तुरंत कर लेंगे, इसका किसी को अंदाजा नहीं था। दोहरे हत्याकांड के बाद आठ वर्ष पहले बेपटरी हुई जिंदगी उसी मुहाने पर लौट गई। घर की खुशियां लुट गईं।
पत्नी का सिंदूर छिना, तो मासूम बच्चे अनाथ हो गए। बुजुर्ग मां बेसहारा हो गई। पति की मौत से वह उबर रही थी लेकिन दो जवान बेटों की हत्या के बाद वह पागल -सी हो गई है।
दोहरे हत्या के बाद कोतवाली के बेलडाड़ रोड पर स्थित गांव फुलवरिया करन गांव अचानक सुर्खियों में आ गया।
रविवार की रात 12 बजे के करीब शिक्षक अनिल तिवारी 30, भाई चंद्रमोहन (24) के साथ गेहूं की कटाई में लगे थे। घर की महिलाएं भी जग रही थीं। गांव के बाहर गेहूं काटने को लेकर दोनों का विवाद छोटू प्रसाद और उसके भाई दयाशंकर से हो गया।
मामला शांत हुआ लेकिन प्रतिशोध की आग में जल रहे छोटू के मन में कुछ और ही पक रहा था। घर जाने के बाद वह तलवार लेकर खेत में पहुंचा और अनिल तिवारी और चंदमोहन के सिर में घोप दिया। दोनों की मौत से इलाका थर्रा गया।
खुद जाकर देखों क्या करके आया हूंःवारदात के समय विधवा गीता देवी दरवाजे पर बैठी थी। दोनों बेटे खेत में गेहूं गिरवा रहे थे। हो हल्ला और विवाद घर तक सुनाई दे रहे थे। इसी बीच छोटू प्रसाद और दयाशंकर लौट रहे थे।
अनिल तिवारी की मां गीता देवी ने पूछा कि किस बात के लिए झगड़ा कर रहे हो, आरोपी छोटू ने हाथ में रखे तलवार को दिखाते हुए कहा कि खुद जाकर देखो, क्या करके आया हूं। विधवा मां मौके पर गई तो दोनों बेटे सड़क पर पड़े थे। महिला के शोर मचाने पर अन्य लोगों को भी हत्या की जानकारी हुई।