जिला पंचायत स्थित जिला पंचायत अध्यक्ष के आवास पर पसरा सन्नाटा।
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देवरिया। दीपक मणि का अपहरण कर करोड़ों की जमीन बैनामा कराना तो महज बानगी भर है। अफसरों की नाक के नीचे भू-माफिया द्वारा आर्थिक-सामाजिक रूप से कमजोर तबके के लोगों की जमीन पर कब्जा करने या जबरन बैनामा कराने का खेल लंबे समय से चला आ रहा है। इसे राजस्व विभाग और उप निबंधन कार्यालय के अफसरों की मिलीभगत से अंजाम दिया जा रहा है। दीपक के कलमबंद बयान के बाद सब रजिस्ट्रार समेत कार्यालय के कई कर्मचारी जांच के घेरे आ गए हैं।
देवरिया खास निवासी दीपक मणि उर्फ पीयूष को 42 दिन पहले आरोपी जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव, उनके भाई समेत पांच लोगों ने सलेमपुर से अपहरण कर दस करोड़ से अधिक की जमीन बैनामा करा लिया। छत्तीसगढ़ में रह रही बहन शालिनी की सक्रियता के बाद पुलिस हरकत में आई और दीपक को सकुशल सपा के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व सांसद रमाशंकर राजभर के कटरे से बरामद किया। इसमें चार लोगों को पुलिस जेल भेज चुकी है। सब रजिस्ट्रार फूलचंद्र यादव का दावा है कि जमीन की मिल्कियत से बहुत ही कम स्टांप लगा था। इसलिए इसका पंजीकरण नहीं हुआ और मूल दस्तावेज स्टांप की कमी वसूलने के लिए सहायक महानिरीक्षक निबंधन को भेज दिया गया है। पुलिस की मानें तो उप निबंधक कार्यालय के अफसर खुद के बचाव में कागजों के हेराफेरी में जुटे हैं। बुधवार की शाम कोर्ट में दीपक ने कलमबंद बयान दिया। इसका अवलोकन विवेचक सदर कोतवाल प्रभातेश श्रीवास्तव ने किया। सामने आए साक्ष्य को देखा जाए तो उप निबंधन कार्यालय के कई कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आ रही है। इसके अलावा भटनी थानाक्षेत्र के रहने वाला एक युवक जिला पंचायत अध्यक्ष का करीबी है। वह युवक दीपक का खास बनकर पल-पल की गतिविधियों को बताने में जुटा था। उसकी भी तलाश पुलिस कर रही है। शहर में जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव जैसे कई ऐसे सफेदपोश हैं जो गोलबंद तरीके से सत्ताधारी नेताओं की शह पर जमीन हथियाने का काम करते हैं।