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जेई-ठेकेदार कर रहे गोलमाल, सड़कें हो रहीं खस्ताहाल
पीएमजीएसवाई की सड़कों का हाल, बिना काम कराए हर साल ले रहे भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनीं सड़कें ठेकेदारों की धनउगाही का जरिया बन गई है। निर्माण के समय की गई गुणवत्ता की कमी आगे चलकर राहगीरों को मुसीबत में डाल रही है। अनुरक्षण में लापरवाही की शिकायत पर आरईडी ने दो ठेकेदारों पर मुकदमा दर्ज कराया है। बावजूद अन्य ठेकेदारों की कार्य प्रणाली पर कोई असर नहीं दिख रहा। ठेकेदार और जेई की मिलीभगत से हर साल अनुरक्षण के नाम पर लाखों का गोलमाल किया जा रहा है।
जिले में पीएमजीएसवाई की कुल 31 सड़कें अनुरक्षण की अवधि में हैं। इनकी मरम्मत के लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग हर साल प्रत्येक किमी के हिसाब से 56 हजार रुपये ठेकेदारों को भुगतान करता है। मरम्मत का काम जेई और ठेकेदार आपसी साठगांठ से कागज में पूरा कर फर्जी बिल वाउचर विभाग में पेश कर देते हैं। हाल ही में कंचनपुर से गोरयाघाट व महुआडीह से हेतिमपुर तक बनी पीएमजीएसवाई सड़क के अनुरक्षण में लापरवाही पर आरईडी ने मेसर्स यूनिवर्सल कंस्ट्रक्शन के प्रोप्राइटर टीपी चंद व मेसर्स दरौली कंस्ट्रक्शन प्रोप्राइटर अवधेश पांडेय पर मुकदमा दर्ज कराया है। फिर भी अन्य सड़कों के अनुरक्षण कार्य में लगे ठेकेदारों की कार्य प्रणाली में कोई सुधार नहीं दिख रहा। लाहिलपार से करौंदी तक बनी करीब 12.1 किमी सड़क निर्माण होने के एक साल बाद से ही टूट गई। इसके निर्माण में 499.81 लाख रुपये खर्च हुए थे। निर्माण का जिम्मा मेसर्स श्रीनेत एंड शांडिल्य कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को मिला था। अनुरक्षण कार्य 27 मई 2014 से 2019 तक निर्धारित है। गड्ढे जस के तस हैं। कुछ जगहों पर पॉलिश पोत दिया गया है। कागज में सड़क दुरुस्त कर जेई और ठेकेदार सरकारी धन की बंदरबांट कर रहे हैं।
वर्जन
जिले में 31 सड़कें अनुरक्षण के दायरे में हैं। इनमें दो की शिकायतें मिलने पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। अन्य सड़कों की निगरानी की जा रही है। जहां भी लापरवाही मिलेगी संबंधित पर कार्रवाई किया जाएगा।
-टीएन राय, एक्सईएन आरईडी।