बलिया, वाराणसी और इलाहाबाद भेजी गईं लड़कियां
प्वाइंटर
घटना की रात पुलिस ने 23 को किया था बरामद, बाद में लाए गए थे तीन बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बालगृह बालिका से मुक्त कराए गए सभी 23 लड़कियों-बच्चों समेत कुल 26 रहवासियों को शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा में बलिया, वाराणसी और इलाहाबाद के केंद्रों में पहुंचा दिया गया। अलसुबह ही उन्हें छह वाहनों से महिला काउंसलर की देखरेख में जिले से रवाना किया गया। शाम तक वह संबंधित केंद्रों में पहुंच गई थीं। लड़कियां रविवार रात से ही राजकीय बाल सदन में रखी गई थीं।
शहर के मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान में शिशु गृह, बालिका संरक्षण और विशेषज्ञ दत्तक अभिकरण संस्था एक ही छत के नीचे संचालित होती थी। पांच अगस्त की रात एसपी रोहन पी. कनय ने छापेमारी कर मामले का पर्दाफाश करते हुए 23 लड़कियों-बच्चों को यहां से मुक्त कराया। पूछताछ के बाद रात में ही मुक्त कराए गए सभी बच्चों-लड़कियों को अस्थायी तौर पर राजकीय बालगृह में रखा गया था। यहां डीएम, एसपी, समेत केंद्र व प्रदेश से जांच दल पहुंचे और सभी के बयान दर्ज किए।
शुक्रवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे छह वाहनों से पुलिस सुरक्षा के बीच इन्हें यहां से रवाना किया गया। 10 से 18 वर्ष की सात किशोरियों को राजकीय बाल गृह बलिया, 18 से अधिक उम्र की 13 महिला व युवतियों को राजकीय पाश्चात्यवर्ती देखरेख संगठन वाराणसी और 10 साल तक के बालकों को राजकीय बाल शिशु गृह इलाहाबाद भेजा गया। उनके साथ राजकीय बालगृह के काउंसलर अर्चना गौर, उर्मिला और सावित्री देवी को भेजा गया है। इन्हें संबंधित स्थानों तक पहुंचाने के लिए महिला व पुरुष सिपाहियों के साथ दरोगाओं की ड्यूटी भी लगाई गई थी। एडीएम सीताराम गुप्ता ने बताया कि सभी लड़कियों-बच्चों को उचित स्थान पर भेज दिया गया है।
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बरामद हुए थे 23, भेजे गए 26
देवरिया। पुलिस ने बालिका गृह से 23 लोगों को बरामद किया था, लेकिन शुक्रवार को 26 लोगों को यहां से भेजा गया। इसमें एक युवती को गोरखपुर से लाया गया था, जबकि दो को अन्य स्थानों से पुलिस लाई थी। राजकीय बाल सदन के अधीक्षक यशोदानंद तिवारी इस बाबत प्रोबेशन विभाग की ओर से जानकारी दिए जाने की बात कहते रहे, जबकि प्रोबेशन विभाग कुछ भी बता पाने में असमर्थता जताता रहा।
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जानकारी देने से कतरा रहे जिला प्रोबेशन अधिकारी
देवरिया। बालिका गृह में कार्रवाई के बाद चर्चा में आए जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार के चेहरे की रंगत उड़ी हुई है। घटना से जुड़ी कोई भी जानकारी देने से प्रोबेशन अधिकारी या अन्य अफसर-कर्मचारी कतरा रहे हैं।