देवरिया। विकास तिवारी की हत्या के मामले में सभी पक्षों को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तलब किया है। आयोग ने सीबीसीआईडी की तरफ से एक वर्ष बाद भी जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराए जाने पर सख्त रुख अख्तियार किया है। आयोग ने आठ सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट मांगी थी।
बिहार प्रांत के गोपालगंज जिले के विजयीपुर थाना क्षेत्र के कर्मचार गांव निवासी जयप्रकाश तिवारी भीखमपुर रोड स्थित काली मंदिर के समीप मकान बनवाकर परिवार के साथ रहते हैं। उनका बेटा विकास तिवारी 23 जुलाई 2017 को तीन दोस्तों के साथ गांव जाने के लिए निकला। आरोप है कि रामपुर कारखाना थाने की पुलिस महुआपाटन घाट पर वाहनों को रोक कर अवैध वसूली के लिए दबाव बनाने लगी। युवकों ने विरोध किया तो पुलिस चारों को थाने ले गई। अगले दिन सुबह विकास तिवारी का शव सदर कोतवाली क्षेत्र के बैकुंठपुर नदी के किनारे मिला। परिवारवालों ने आनन-फानन में पोस्टमार्टम कराकर शव का अंतिम संस्कार कर दिया। पिता जयप्रकाश तिवारी ने रामपुर कारखाना थाने के दो सिपाहियों समेत अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। युवक की स्कूटी रामपुर कारखाना थाने में मिली थी। युवक की मौत को पुलिस हत्या मानने को ही तैयार नहीं थी। इस पर परिवारवालों ने डीएम से गुहार लगाई। मृतक के भाई विवेकानन्द तिवारी ने इस मामले को हाईकोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचाया। मानवाधिकार आयोग ने मामले की सुनवाई और साक्ष्यों को देखने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था। आयोग ने पोस्टमार्टम में नियमों का पालन नहीं करने पर फटकार लगाई थी। मानवाधिकार आयोग ने 19 मार्च 2018 को डीजीपी को आदेश दिया कि विकास तिवारी हत्याकांड की जांच सीबीसीआईडी से कराकर आठ सप्ताह में रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। सीबीसीआईडी ने एक वर्ष बाद भी जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सामने पेश नहीं किया। इस पर आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी पक्षों को तलब किया है।
न्यायिक जांच भी नहीं हुई पूरी
देवरिया। पीड़ित के पिता की तहरीर पर तत्कालीन डीएम ने घटना की न्यायिक जांच का आदेश दिया। सीआरओ मनोज कुमार को जांच दी गई। वह हत्याकांड की जांच कर रहे हैं। घटना के आठ माह बाद भी जांच पूरी नहीं कर सके। जांच के समय मृतक के दो दोस्तों ने लिखित रूप से बयान दिया है कि पुलिस सभी को रामपुर कारखाना थाने में ले गई। पुलिस की पिटाई से उसकी मौत हो गई। रात में पुलिस ने शव को नदी के किनारे फेंक दिया था। इसके बाद जांच आगे नहीं बढ़ सकी।