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घर में कैद हुए आरोपी के माता-पिता को पुलिस ने रिश्तेदार के घर पहुंचाया

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उग्र गांववालों ने घेरा आरोपी का घर
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गोविंद पांडेय की हत्या से ग्रामीणों में काफी नाराजगी
पुलिस ने आरोपी के माता-पिता को रिश्तेदार के घर पहुंचाया
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। सकरापार में पिटाई से गोविंद पांडेय की मौत के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। नाराज लोगों ने मंगलवार को आरोपी का घर घेर लिया। इसमें महिलाओं की भीड़ अधिक थी। उनका गुस्सा देख आरोपी के माता-पिता व अन्य परिजनों ने खुद को घर में कैद कर लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने भीड़ को खदेड़ते हुए आरोपी के घरवालों को बाहर निकाल कर रिश्तेदार के घर पहुंचाया।
सकरापार गांव निवासी गोविंद पांडेय चार भाइयों में दूसरे नंबर के थे। वह गांव के हेमंत पांडेय की गिट्टी बालू की दुकान पर काम कर बच्चों की परवरिश करते थे। पुलिस के अनुसार हेमंत की दुकान पर शाम को अक्सर गांव के युवक बैठते हैं और दावत होती है। सोमवार की रात भी दुकान पर दावत थी। इसमें गोविंद भी शामिल थे। शराब के नशे में सोनू और गोविंद के बीच विवाद हुआ था। लोगों ने बीचबचाव कर सोनू को वहां से हटा दिया। बाद में रास्ते में घात लगाकर बैठे सोनू ने गोविंद की पिटाई कर मौत के घाट उतार दिया। दिन में करीब 11 बजे आरोपी के पिता ने पुलिस को फोन कर बताया कि मेरा घर गांव की महिलाओं ने घेर रखा है, अनहोनी हो सकती है। आनन-फानन में पहुंची पुलिस ने एकजुट हुई महिलाओं को खदेड़ा और आरोपी के बुजुर्ग माता-पिता को घर से निकाल उनके रिश्तेदार के घर पहुंचाया।
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चार माह में तीन हत्याएं
सकरापार गांव में चार माह के अंदर तीन लोगों की जान जा चुकी हैं। करीब चार माह पूर्व एक पुजारी की हत्या हुई और और इसके प्रतिशोध में गांव के लोगों ने एक युवक को मार डाला था। शहर से सटा गांव होने के बावजूद हत्या की दुस्साहसिक घटनाएं पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रही हैं।


हत्या की नीयत से नहीं की थी मारपीट
पुलिस कस्टडी में रखे गए आरोपी घनश्याम मिश्र उर्फ सोनू का कहना है कि शराब के नशे में हेमंत की दुकान पर पहली बार विवाद हुआ था। वहां पर गोविंद और अन्य लोगों ने मेरे साथ अभद्रता की थी। इसी बात को लेकर गोविंद को रास्ते में घेरकर पिटाई की। हत्या की नीयत से मारपीट नहीं की थी।
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बीच राह में साथ छोड़ चले गए मम्मी-पापा
देवरिया। मां की ममता बचपन में ही छीन गई और मुफलिसी के बीच जिंदगी के सफर में आगे बढ़ा रहे मंगल पांडेय और प्रेमप्रकाश के सिर से पिता का भी साया उठ गया। दरवाजे पर पहुंचने वाले लोग बेसहारा बच्चों की दर्दभरी दास्तां सुनकर द्रवित हो जा रहे थे। इनकी दो वक्त की रोटी कैसे चलेगी, इसकी चिंता बढ़ गई हैं। 13 वर्षीय मंगल के मां की मौत पहुले ही हो गई थी। मंगल ने पांचवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद पिता के सहयोग में जुट गया। गांव के पास एक फर्नीचर की दुकान पर काम करता है। वहीं छोटा भाई प्रेमप्रकाश गांव के परिषदीय स्कूल में कक्षा तीन में पढ़ता है। नशे के दलदल में फंसे गोविंद ने किसी तरह बच्चों का परवरिश की। सोमवार की रात पड़ोसी युवक घनश्याम उर्फ सोनू की पिटाई से उनकी जान चली गई।
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