भाटपार रानी थाना के ग्राम दनऊर में दलित महिला कमला देवी की हत्या के बाद रोते बिलखते उसके दोनों पुत्र कान्हा व सोनू तथा दादी जगरानी देवी।
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भाटपाररानी। थानाक्षेत्र के दनउर गांव में शुक्रवार को अनुसूचित वर्ग की महिला की गला काटकर हत्या कर दी गई। उसका शव छोटी गंडक नदी के किनारे सरपत में फेंका गया था। शरीर के अधिकांश कपड़े गायब थे। मुंह में भी कपड़ा ठूंसा गया था। इससे दुष्कर्म की भी आशंका जताई जा रही है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया है। महिला के ससुर की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर पुलिस छानबीन में जुटी है।
ग्राम दनउर निवासी पारस का बड़ा बेटा अवधेश प्रसाद दो वर्ष से दुबई में है। घर पर पत्नी कमला देवी (35) बच्चों व सास-ससुर के साथ रहती है। शुक्रवार की सुबह करीब नौ बजे कमला घर से निकली। काफी देर बाद भी जब वापस घर नहीं आई तो उसकी भतीजी सीपू और दादी जगरानी देवी गांव में खोजने लगी। उसके मोबाइल नंबर पर कॉल भी किया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। कमला को खोजते हुए दोनों गांव से बाहर छोटी गंडक नदी के किनारे पहुंची। वहां सरपत के बीच एक खोह में कमला देवी की अर्धनग्न लाश दिखी। धारदार हथियार से उसका गला रेत दिया गया था। मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। शोर मचाने पर अन्य ग्रामीण पहुंच गए। सूचना पाकर सीओ बृजेंद्र राय, एसओ सुदेश शर्मा, एसआई पीके राय, महिला पुलिस बल के साथ पहुंचे। घटनास्थल पर छानबीन के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सीओ ने बताया कि गला रेतकर महिला की हत्या की गई है। पोस्टमार्टम के बाद ही दुष्कर्म की बात स्पष्ट हो पाएगी। थानाध्यक्ष सुदेश शर्मा ने बताया कि महिला के ससुर पारस की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया कर लिया गया है।
कान्हा और सोनू से उठ गया मां की ममता
डॉ. मोतीलाल
भाटपाररानी। दनउर गांव में दिनदहाड़े हुई दलित महिला की हत्या ने जहां गांव में सनसनी फैला दी वहीं, पूरे परिवार को झकझोर दिया है। ग्रामीणों की मानें तो इससे पहले गांव में कभी भी ऐसी वारदात नहीं हुई। इस घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया है। उधर, मौके पर पहुंचे कमला देवी के पुत्र नौ वर्षीय कान्हा व छह वर्षीय सोनू मां का शव देख बिलख पड़े। कान्हा यूकेजी व सोनू एलकेजी का छात्र था। मां के शव से लिपटकर विलाप कर रहे बच्चे उसे उठाने की कोशिश कर रहे थे। वह बार-बार कह रहे थे कि मां उठो, हम स्कूल से आ गए। बच्चों का विलाप देख हर किसी की आंखें डबडबा गईं। बताते हैं कि कमला ने सुबह बच्चों को रोज की तरह नहलाने धुलाने के बाद तैयार कर स्कूल भेजा था। उन्हें क्या पता था कि जब लौटेंगे तब उनकी मां उन्हें जीवित नहीं मिलेगी।