कृषि और औद्योगिक स्थल बने शराब तस्करी के नए ‘ठिकाने’
छापामारी में खुल रही पोल, औद्योगिक स्थलों से बरामद हुई है शराब
सीमावर्ती जिले में अवैध शराब बेचकर मालामाल हो रहे तस्कर
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बिहार सीमा से सटे जिले में शराब तस्करी का ट्रेंड लगातार बदल रहा है। दुकानों से बिकने वाली शराब अब मिल, फैक्ट्री, गोदामों से भी बिक रही है। फॉर्म हाउस का भी तस्करी में इस्तेमाल हो रहा है। कई सफेदपोश इस धंधे में लग गए हैं तो कई सामान्य लोग भी शराब की तस्करी के जरिए चंद वर्षों में ही लाखों में खेलने लगे हैं। तस्करी के खुले खेल के बावजूद पुलिस-प्रशासन धृतराष्ट्र की भूमिका है। जड़ों पर प्रहार करने की बजाए पत्तियां और टहनियां छांटने में जिम्मेदार मशगूल हैं।
बिहार में शराबबंदी के बाद से ही जिले की सीमा तस्करों के लिए मुफीद हो गई है। हरियाणा, अरुणांचल में बिकने वाली शराब बिहार में खपाई जा रही है। इस धंधे में लगे तस्कर बाहरी क्षेत्रों से लाकर शराब पहले यहां डंप करते हैं, फिर अनुकूल माहौल देखकर बॉर्डर पार करा देते हैं। मजबूत राजनीतिक रसूख वाले इन तस्करों पर अव्वल तो पुलिस हाथ नहीं डालती और जब कोई कार्रवाई करती भी तो तस्कर ट्रेंड बदल देते हैं। अब नए ट्रेंड में कृषि व औद्योगिक स्थलों का तस्करी में इस्तेमाल हो रहा है। पिछले कुछ महीनों में हुई पुलिसिया कार्रवाई भी इसका सबूत दे रही है। पुलिस को इंटरलॉकिंग ईंट की फैक्ट्री से अवैध शराब मिली तो फॉर्म हाउस में भी शराब का जखीरा मिला। खेत के अंदर से शराब की बरामदगी हुई तो तीन दिन पूर्व फ्लोर मिल से काफी मात्रा में शराब की खेप ने इसे स्पष्ट कर दिया है। गौर फरमाने वाली बात है कि 24 घंटे चौकन्नी रहने वाले क्षेत्रीय पुलिसकर्मियों की शराब के इन अवैध ठिकानों पर नजर ही नहीं पड़ती और पड़ती भी है तो वह बिल्ली के गले में घंटी बांधने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं होते। यही कारण है कि नहीं तस्करी थम पा रही और न ही तस्करों का मनोबल टूट रहा है।
केस एक:
फ्लोर मिल में मिली 19 लाख की शराब
रुद्रपुर के उसरा बाजार स्थित सुभाष चंद्र जायसवाल के फ्लोर मिल से तीन दिसंबर को 19 लाख रुपये मूल्य की अवैध शराब बरामद हुई है। आटा, मैदा बनाने वाली इस मिल में अवैध शराब की बड़ी खेप मिलने के बाद से पुलिस महकमे में खलबली है। संबंधित थाना प्रभारी को लाइन हाजिर भी कर दिया गया। हालांकि अफसर इसे सिर्फ संयोग बता रहे हैं।
केस दो:
इंटरलॉकिंग फैक्ट्री में अवैध शराब का भंडार
खुखुंदू थानाक्षेत्र के सुबिधर गांव में पुलिस ने 21 सितंबर को पुलिस ने मनीष मिश्र के इंटरलॉकिंग ईंट की फैक्ट्री पर छापा मारा था। यहां से 13632 शीशी अवैध अंग्रेजी शराब पकड़ी गई। इसके अगले ही दिन फिर इसी स्थान पर दबिश में 526 पेटी शराब की बरामदगी हुई।
केस तीन:
फॉर्म हाउस में मिला शराब का जखीरा
जुलाई माह में पुलिस ने लार थानाक्षेत्र के रामबाग स्थित अरविंद सिंह के फॉर्म हाउस से स्वाट टीम ने छापा मारा तो एक ट्रक से अधिक शराब की अवैध खेप बरामद हुई। कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग भी हुई। अहम बात है कि फॉर्म हाउस मालिक का नाम पहले भी तस्करी में आ चुका है, मगर पुलिस उसकी गतिविधियों से बेफिक्र रही।
पुलिस रिकॉर्ड में नहीं है कोई शराब माफिया
लगातार तस्करी की बरामद हो रही शराब, फिर भी पुलिस सुस्त
छापामारी के दौरान पुलिस पर फायरिंग भी कर चुके हैं तस्कर
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। पुलिस की एंटी माफिया सेल अब सिर्फ कागजों में ही सिमट गई है। वन, भू, शराब, बस सहित अन्य तरह के माफिया के बारे में पुलिस के पास कोई सूचना नहीं है। जिला प्रशासन ने जरूर 28 भू-माफिया चिह्नित किए हैं, मगर इनके खिलाफ भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। नतीजा सरकार की मंशा को धता बताते हुए माफियातत्व जिले की कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहे हैं। सूबे की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माफिया पर कार्रवाई को लेकर कड़े निर्देश दिए थे। सीएम के निर्देश पर ही अन्य जिलों की तरह यहां भी एंटी माफिया सेल स्थापित किया गया। इस सेल को भू, बस, वन, शराब सहित अन्य तरह के कार्यों में हावी माफिया की सूची तैयार कर शिकंजा कसने की जिम्मेदारी थी। शुरुआती सक्रियता के बाद यह सेल कागजों में गुम हो गया है। आलम यह है कि अब माफिया का कोई रिकॉर्ड भी पुलिस के पास उपलब्ध नहीं है। जिले की पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती शराब माफिया की है। बिहार सीमा से सटे होने के कारण यहां शराब के धंधे में कई माफिया सक्रिय हैं। इनकी शह पर ही शराब की खेप अवैध तरीके से बिहार पहुंचाई जा रही है तो कहीं खुद चोरी-छिपे मिलावटी शराब तैयार कर बिक्री हो रही है। पुलिस ने लार, सलेमपुर, बनकटा, खुखुंदू, खामपार, बघौचघाट, गौरीबाजार, रामपुर कारखाना, रुद्रपुर क्षेत्र में अवैध शराब के कई बड़े मामलों का भंडाफोड़ किया है। इस कारोबार में कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं। कई तो ऐसे हैं जो पूर्व में भी अवैध शराब की तस्करी में जेल जा चुके हैं और वहां से छूटने के बाद फिर से उसी धंधे में लग जा रहे हैं। पिछले महीनों लार में एक तस्कर के फॉर्म हाउस पर छापामारी के दौरान पुलिस पर फायरिंग भी हुई थी। वहीं, रामपुर कारखाना में भी अवैध शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। खुखुंदू में एक इंटरलॉकिंग ईंट की फैक्ट्री में शराब पकड़ा गया था। इन सबके बावजूद पुलिस रिकॉर्ड में इनमें से किसी भी कारोबारी का नाम शराब माफिया की सूची में नहीं है। जानकारों की मानें तो पुलिस की सुस्ती का ही कारण है कि माफिया बेखौफ ढंग से जिले में शराब के अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं। दो साल में जिले में करोड़ों रुपये की शराब पकड़ी गई है। इसके बाद भी एक भी शराब माफिया चिह्नित न होना पाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है। इस बाबत एसपी एन. कोलांचि ने कहा कि जिले में कोई भी शराब माफिया चिह्नित नहीं है। अब तक जिले में पकड़ी गई शराब और तस्करों के बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है। इसके बाद यह कार्रवाई की जाएगी।