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नियमों पर भारी, ई-रिक्शा की सवारी

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कोआपरेटिव तिराहे पर ईरिक्शा चालको के कारण लगता है जाम। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। ई-रिक्शा ने लोगों के आवागमन को तो सरल बनाया है, मगर यातायात व्यवस्था की दुश्वारी भी बढ़ा दी है। सड़कों पर बड़ी संख्या में दौड़ते ई-रिक्शा के लिए यातायात नियमों का कोई मायने नहीं है। चालक सवारियां उठाने और उतारने के लिए जहां चाहे वहां वाहन लेकर घुस जा रहे हैं। शहर में लगने वाले जाम के लिए 50 प्रतिशत इन्हें ही जिम्मेदार माना जा रहा है। सड़कों पर फर्राटा भर रहे ई-रिक्शा वालों को किसी नियम और कार्रवाई का भय नहीं रहता है।
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शहर में फिलहाल एक हजार से अधिक ई-रिक्शा संचालित हैं। रेलवे स्टेशन परिसर, गोरखपुर ओवरब्रिज, जिला अस्पताल, बस स्टेशन पर तो इनकी वजह से लोगों को काफी दिक्कत होती है। ई-रिक्शा चालक मनमाने तरीके से वाहन चलाने लगते हैं। शहर के मुख्य सड़क पर इनके चलने के लिए कोई लेन नहीं है, इसलिए यह कहीं भी चलते रहते हैं। रेलवे स्टेशन परिसर में ट्रेन आने के समय तो यात्रियों का निकलना और अंदर प्रवेश करना कठिन हो जाता है। कार्रवाई के नाम पर जिम्मेदारों की ओर से केवल कोरमपूर्ति ही की जाती है। कभी अभियान चलाया जाता है तो दो-चार ई-रिक्शा चालकों पर कार्रवाई होती है। आरपीएफ भी कभी-कभी कार्रवाई करती है।


मात्र 400 ई-रिक्शा का है रजिस्ट्रेशन
सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में मात्र 400 ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन हुआ है। शेष ई-रिक्शा वैसे ही शहर की मुख्य सड़कों और गलियों में फर्राटे भरते रहते हैं। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि पहले में जो ई-रिक्शा आए थे, उनका चेचिस नंबर नहीं था। ऐसे में उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका था। हालांकि इसमें से अधिकांश पुराने हो गए हैं और कुछ तो कबाड़ में बिक भी गए हैं। बाद में आए ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन कराया गया है।
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चालकों के पास सिर्फ एमएलवी लाइसेंस
ई-रिक्शा चालकों के लिए अलग से ड्राइविंग लाइसेंस बन रहा था। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया कि एलएमवी ड्राइविंग लाइसेंस धारक भी ई-रिक्शा चला सकते हैं। अधिकांश के पास यही लाइसेंस है। कम उम्र के कुछ लोग ई-रिक्शा चलाते देखे जाते हैं। इनके खिलाफ अभियान चलाने की तैयारी की गई है।



ई-रिक्शा चालकों को बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन न चलाने और नियमों का पालन करने की बात कही गई है। इनकी वजह से जब दिक्कत होती है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। पिछले सप्ताह आठ ई-रिक्शा का चालान किया गया था। हालांकि बाद में सभी जुर्माना भरकर छूट गए।
- राजीव चतुर्वेदी, एआरटीओ।


ई-रिक्शा की संख्या अधिक है। मुख्य सड़क पर अन्य वाहनों के साथ ही ये भी चलते रहते हैं। सवारी उतारने और चढ़ाने के चक्कर में कहीं रोक देते हैं। इससे दिक्कत होती है। इनके खिलाफ बराबर कार्रवाई की जाती है।
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- रामवृक्ष यादव, टीएसआई।
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