देवरिया। घूस लेते रंगेहाथ पकड़े गए गोरखपुर एडी हेल्थ कार्यालय के क्लर्क को एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। वहीं, मामले में नाम आने के बाद एडी हेल्थ से पूछताछ की कवायद शुरू हो गई। क्लर्क का बयान सही है या गलत, इसकी जांच में टीम जुटी है।
कुशीनगर जिले के तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के भेलया गांव निवासी दिनेश्वर मिश्र न्यू पीएचसी केंद्र रामलक्षन में लैब असिस्टेंट हैं। बेटी की शादी के लिए सीएमओ कार्यालय में जीपीएफ से साढ़े सात लाख रुपये लोन के लिए आवेदन किया था। रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ कार्यालय से फाइल एडी हेल्थ कार्यालय भेज दी गई थी। दिनेश्वर मिश्र का कहना था कि वह लोन पास कराने के लिए एडी हेल्थ पुष्कर आनंद से मिले थे। उन्होंने क्लर्क नुरूलहोदा से मिलने को कहा। नुरूलहोदा ने इसके एवज में डेढ़ प्रतिशत घूस मांगा। आर्थिक परेशानी बताने पर एक प्रतिशत घूस देने की बात कही। पांच हजार लैब असिस्टेंट ने दे दिया और 30 मई को एडी हेल्थ ने जीपीएफ फाइल पर हस्ताक्षर भी कर दिया। 2500 रुपये के लिए क्लर्क इसे दौड़ा रहा था। शिकायत पर एंटी करप्शन टीम ने सोमवार की शाम रेलवे स्टेशन कैंपस में घूस लेते हुए क्लर्क को रंगेहाथ पकड़ लिया। क्लर्क ने पूछताछ में बताया था कि रिश्वत के रुपये में 60 फीसदी हिस्सा एडी हेल्थ को जाता है। इस बयान के आधार पर तहरीर में एडी हेल्थ का भी नाम शामिल करते हुए दोपहर में एंटी करप्शन टीम ने कोर्ट गोरखपुर में आरोपी क्लर्क को पेश किया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। एंटी करप्शन के प्रभारी निरीक्षक बब्बन यादव ने बताया कि एडी हेल्थ का नाम मामले में शामिल हुआ है। इसकी जांच की जा रही है कि क्लर्क का बयान सत्य है या गलत।