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वर्ष 2014 में शिक्षामित्रों के समायोजन में भी हुआ था खेल

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फर्जी शिक्षक भर्ती मामला
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शिक्षामित्रों के समायोजन में भी हुआ था खेल
कुछ ब्लॉकों के एबीआरसी की भी रही है संलिप्तता
कभी भी उठाए जा सकते हैं फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। फर्जी शिक्षक भर्ती मामले में बीएसए कार्यालय के बाबुओं के साथ ही कई ब्लॉकों के एबीआरसी ने भी खेल किया है। वर्ष 2014 में शिक्षामित्रों के समायोजन प्रक्रिया के दौरान चार ब्लॉकों के चर्चित एबीआरसी ने फर्जीवाड़े में अफसरों का भरपूर साथ दिया। जो शिक्षामित्र पात्र नहीं थे, उनके दिव्यांगता प्रमाण पत्र सहित कई अन्य दस्तावेजों को फर्जी ढंग से बनाकर नियुक्ति कराई। स्थायी नौकरी पाने की आस में शिक्षक पद पर समायोजित होने वाले शिक्षामित्रों ने इसके लिए मुंहमांगा धन भी खर्च किया था।
फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे जिले में नौकरी कर रहे संदिग्धों की कुंडली एसटीएफ ने खोलनी शुरू की है तो कई राज बाहर आने लगे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो शिक्षामित्रों के समायोजन प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2014 में द्वितीय सूची में अधिकारियों व बीईओ के साथ संबंधित ब्लॉकों के एबीआरसी ने खूब मनमानी की। तीन ब्लॉकों के एबीआरसी ने अभ्यर्थियों की नियुक्ति कराने में अधिकरियों को चढ़ावा चढ़ाने के साथ ही अपनी भी जेबें भरीं। कई शिक्षामित्रों को फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नियुक्त किया गया। एक चर्चित एबीआरसी ने तो अपनी पहुंच के बल पर कई रिश्तेदारों की नियुक्तियां करा ली थीं। अब जांच शुरू होने के बाद फर्जी ढंग से नौकरी कर रहे शिक्षकों को भी भय सताने लगा है कि कभी भी जांच टीम उनके पास पहुंच सकती हैं।
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हर काउंसिलिंग में हुई गड़बड़ी
वर्ष 2010 के बाद हुई शिक्षक भर्ती नियुक्तियों में जिला मुख्यालय पर हुई हर काउंसिलिंग में अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से खेल किया गया है। वर्ष 2014 से 2016 तक की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान तो जिन अभ्यर्थियों की मेरिट नीचे थी, उन्होंने भी सेटिंग के जरिए नौकरी हासिल कर ली। तत्कालीन सदर बीईओ रहे अधिकारी की कृपा अपात्रों पर कुछ ज्यादा ही बरसती रही।
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एसटीएफ के मांगे गए 44 शिक्षकों के रिकॉर्ड लखनऊ गए
एसटीएफ गोरखपुर के प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि फर्जी शिक्षकों के मामले में चिह्नित 44 शिक्षकों के रिकॉर्ड लखनऊ कार्यालय पहुंच गए हैं। वहीं, पर इन अभिलेखों की गहन जांच चल रही है। गिरफ्तार दोनों सरगनाओं से भी पूछताछ जारी है। इसमें देवरिया में सैकड़ों शिक्षकों के फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी करने की बात पता चली है। इनके बारे में ठोस सबूत मिलने के बाद ही इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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