देवरिया। शहर के कसया ढाले पर बनने वाला अंडरपास कानूनी दांवपेच में उलझ गया है। मामला दीवानी कचहरी से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। इसके चलते रेलवे ने भी इस परियोजना से अपना ध्यान हटा लिया है।
अब सारी उम्मीद इसी क्रॉसिंग पर बनने वाले ओवरब्रिज से है। हालांकि, वह भी अभी किंतु-परंतु में अटका है। पूर्वोत्तर रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि सेतु निगम की तरफ से उपलब्ध कराए गए डिजाइन की खामियों को दूर कराया जा रहा है।
देवरिया सदर रेलवे स्टेशन के पास ही कसया ढाला है। इस ढाले से रोजाना 40 से अधिक ट्रेन और मालगाड़ी गुजरती है। सुबह से देर रात तक ढाला उठता-गिरता रहता है। सुबह, दोपहर और शाम को यहां लंबा जाम लगता है। न सिर्फ शहर के बल्कि भिखमपुर रोड के जरिये बिहार जाने-आने वालों को यहां जूझना पड़ता है।
आम लोगों की इस दुश्वारी को देखते हुए ही पूर्वोत्तर रेलवे की तरफ से अंडरपास बनाने की मंजूरी दी गई थी। इसके लिए कार्यदायी एजेंसी का नाम भी तय कर दिया गया था। उसके बाद बगल के लकड़ी हट्टा के चार लोगों ने जमीन को लेकर दीवानी कचहरी और फिर हाईकोर्ट में मुकदमा दाखिल कर दिया।
करीब एक साल का वक्त गुजर जाने के बाद भी इस मुकदमे का निस्तारण नहीं हो पाया। अब रेलवे के अफसरों का कहना है कि जब तक मुकदमा खत्म नहीं हो जाता, अंडरपास का मामला आगे नहीं बढ़ेगा।