10 करोड़ की लागत से बनेगा, आलू भंडारण के लिए किसान होते हैं परेशान
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संवाद न्यूज एजेंसी
भाटपाररानी/देवरिया। किसानों को आलू भंडारण की सुविधा होगी। अब उन्हें आलू को बिहार प्रांत सहित अन्य स्थानों पर शीतगृह में रखने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। एक उद्यमी ने भाटपाररानी में शीतगृह बनाने के लिए एमओयू किया है।
10 करोड़ की लागत से बनने वाले इकलौते शीतगृह का निर्माण कार्य हो रहा है। इसमें 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। चार माह में कार्य पूरा हो जाएगा। इसके बनने से करीब दस हजार किसानों को फायदा होगा।
जिले में एक भी शीतगृह नहीं है। इसके चलते किसानों को आलू की पैदावार होने के बाद अपनी उपज को सुरक्षित रखने की समस्या है। इसको लेकर उन्हें परेशान होना पड़ता है। इसे देखते हुए किसान आलू की बुआई जरूरत के अनुरूप ही करते हैं। बड़े किसान अपने आलू का बिहार प्रांत के भोरे, गोपालगंज और कुशीनगर जनपद में भंडारण करते हैं। इसके लिए उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। खर्च भी अधिक पड़ता है। इन स्थानों पर करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन आलू रखा जाता है।
मझोले और छोटे किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। अब विकास खंड भाटपाररानी क्षेत्र के ग्राम परोहा में 10 करोड़ रुपये की लागत से आलू भंडारण के लिए उद्योग विभाग की देखरेख में शीतगृह का निर्माण एक व्यक्ति की ओर से किया जा रहा है। एक लाख 20 हजार मीट्रिक टन आलू भंडारण की क्षमता होगी। निर्माणस्थल का जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह और मुख्य विकास अधिकारी प्रत्यूष पांडेय भी दौरा कर चुके हैं।
जिले में कहीं शीतगृह नहीं है। यह पहला शीतगृह होगा। यहां आलू भंडारण की इतनी क्षमता होगी कि किसानों को दूसरी जगह नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें आलू को सुरक्षित रखने में सहूलियत होगी। अब तक जिले के किसान अपने आलू का भंडारण यहां नहीं कर पाते हैं। अब तक किसान बिहार के भोरे, गोपालगंज और कुशीनगर जिलों में आलू का भंडारण करते हैं। खर्च अधिक होने के कारण बड़े किसान और व्यापारी को ही लाभ मिलता है। अब छोटे और मझोले किसानों को भी इसका लाभ होगा।
-अजय कुशवाहा, शीतगृह निर्माणकर्ता व जिला पंचायत सदस्य
शीतगृह बन जाने से आलू भंडारण के लिए किसानों को काफी सुविधा होगी। अब किसानों को लंबी दूरी तय करने और अधिक खर्च कर आलू भंडारण से निजात मिलेगी। इसके बन जाने से यहां छोटे और मझोली किसान भी कम खर्च में अपना आलू का भंडारण कर सकेंगे।
-रमेश कुशवाहा, ग्राम प्रधान व प्रगतिशील किसान
क्षेत्र में शीतगृह बन जाने से यहां के छोटे सहित अन्य किसान भी अपना आलू भंडारण कर सकेंगे। पहले नहीं कर पाते थे। साथ ही आलू की खेती की तरफ अब किसानों का रुझान बढ़ेगा। किसान कम समय में आलू की पैदावार कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर पाएंगे।
-जयप्रकाश यादव, किसान
भाटपाररानी क्षेत्र में शीतगृह बनना यहां के किसानों के लिए वरदान साबित होगा। तीन माह में ही किसान आलू की फसल लेकर उसका स्टोर कर मुनाफा कमा सकेंगे। उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार करने में यह मददगार साबित होगा। शीतगृह के निर्माणकर्ता ने सराहनीय कार्य किया है। वह बधाई के पात्र हैं।
-भरत प्रसाद, किसान