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Deoria News: नहीं हुए सूर्यदेव के दर्शन, पछुआ हवा ने कंपाया

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पार गिरने के बाद गर्म कपडो की खरिदारी करते लोग।संवाद - फोटो : DEORIA
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नहीं हुए सूर्यदेव के दर्शन, पछुआ हवा ने कंपाया
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न्यूनतम आठ डिग्री पर रहा पारा, सरकारी कार्यालयों में भी दिखा असर, बाजार में कम रही भीड़
कक्षा एक से आठवीं तक के निजी स्कूलों में अवकाश होने से अभिभावकों ने ली राहत की सांस
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मंगलवार का दिन भी जिलेवासियों की कठिन परीक्षा लेता रहा। कोहरे व धुंध से पटे वातावरण एवं बर्फीली हवा के चलते बढ़ी ठंड ने लोगों को पूरे दिन सिहराया। जनपद में लगातार तीसरे दिन सूर्यदेव बादलों में छिपे रहे। धुंध और कोहरे की वजह से आवागमन पर असर पड़ा।
बुजुर्गों ने घर के अंदर रहने में ही भलाई समझी। बच्चों को भी अभिभावक बाहर निकलने से रोकते रहे। देर रात तक पारा अपने न्यूनतम स्तर आठ डिग्री सेल्सियस पर ही बना रहा। इससे सरकारी कार्यालयों, प्रमुख बाजारों में अन्य दिनों की अपेक्षा चहल-पहल कम रही। सोमवार रात भी पारा आठ डिग्री पर ही था। अभी तीन-चार और दिन पूरे जनपद में शीतलहर और गलन के कारण भीषण ठंड पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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मंगलवार की भोर से ही घना कोहरा छाया रहने के कारण आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित रहा। दिनभर धुंध व बदली छाई रही। आम से लेकर खास तक भगवान भास्कर के उदय होने का बेसब्री से इंतजार करते रहे। धूप नहीं होने से लोगों को राहत नहीं मिल सकी। शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण, हर जगह जाड़े से बचने के लिए लोग अलाव की व्यवस्था करने में जुटे रहे।
उधर, कक्षा एक से आठवीं तक के निजी व सभी बोर्ड से संबंधित स्कूल व मदरसा में तीन व चार जनवरी तक ठंड के प्रकोप के चलते जिला प्रशासन ने अवकाश घोषित किया है। इसके बाद अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। सबको अपने पाल्यों के स्वास्थ्य की चिंता सता रही थी।
पछुआ हवा के चलते गुलजार रहने वाले सुभाष चौक, मालवीय रोड, मोतीलाल रोड, हनुमान मंदिर रोड की सड़कों व प्रमुख बाजारों में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के नहीं आने से हलचल कम रही। इससे दुकानदार निराश नजर आए। सरकारी कार्यालय व घरों में ठंड से बचने की जुगत करने में लोग जुटे रहे। सार्वजनिक जगहों पर अलाव का मुकम्मल इंतजाम न होने से भी जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा।
तीन से चार घंटे विलंब से चल रहीं ट्रेनें, बसों के पहिये भी रुके
कोहरे ने ट्रेन व बसों की रफ्तार पर रोक लगा दी है। वैशाली, कृषक, चौरीचौरा मौर्या, आम्रपाली, पाटलिपुत्र, पूर्वांचल, बाघ एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनें स्टेशनों पर तीन से चार घंटे विलंब से पहुंच रही हैं। इससे इंतजार करने वालों को परेशानी हो रही है। रोडवेज में भी ठंड के चलते चालक-परिचालक को नियमित ड्यूटी करने में दिक्कत हो रही है। उनके समय से नहीं आने से कई बसें डिपो में ही खड़ी रह जा रही हैं। एसएसआई राकेश पति त्रिपाठी ने बताया कि डिपो के पास 178 बसों का बेड़ा है। जो संसाधन उपलब्ध हैं, उसी से काम चलाया जा रहा है।
....फोटो समाचार
मंडी से खाली हाथ लौट रहे दिहाड़ी मजदूर
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। सर्द हवाओं से बदला मौसम का मिजाज दिहाड़ी मजदूरों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है। काम की तलाश में रोज नगर की मजदूर मंडी में आ रहे मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। रोजी-रोटी पर संकट उत्पन्न हो जाने से उनके परिवार में चूल्हे पर दोनों वक्त की रोटी नहीं पक पा रही है।
रुद्रपुर नगर के पूर्वी तिवारी टोला वार्ड में मजदूरों की मंडी लगती है। यहां दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूरी और राजगीर मिस्त्री की बोली लगती है। चौराहे पर सुबह से ही करीब दो सौ मजदूरों का जमावड़ा होता है। काम करने के लिए लोग मंडी में पहुंचकर चुनकर मजदूर और मिस्त्री ले जाते हैं। पिछले एक सप्ताह से मंडी में मजदूरों की आमद तो हो रही है, लेकिन उनके खरीदारों की कमी हो गई है।
काम की तलाश में मंडी आ रहे मजदूरों को खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। यदि मौसम का यही हाल रहा तो रोज कमाकर खाने वाले दिहाड़ी मजदूरों को भूखे सोना पड़ सकता है। मंगलवार को मंडी में काम तलाशने आए लोगों के चेहरों पर रोजी नहीं मिलने का दर्द साफ झलक रहा था।
स्पीकअप
ठंड में रोजी का अकाल पड़ गया है। चार दिन से रोज मंडी आ रहा हूं लेकिन काम नहीं मिल रहा है। किसी तरह से बच्चों का खाना पक रहा है। गांव में भी काम नहीं चल रहा है।
-नान्हू पासवान, राजमिस्त्री करमेल बनरही निवासी
पांच दिन से सूर्य भगवान का दर्शन नहीं हुआ। शीतलहर के कारण रोजगार पर भीषण प्रभाव पड़ा है। शीतलहर में कोई काम नहीं कराना चाहता है। काम कम हो जाने से सबको रोजगार नहीं मिल रहा है।
-श्रवण कुमार, दिहाड़ी मजदूर
पांच किलोमीटर दूर से चलकर काम के चक्कर में पांच दिन से मजदूर मंडी में आ रहे हैं। सुबह पांच बजे काम के तलाश में निकलना पड़ता है। काम नहीं मिलने पर दिन में 11 बजे घर लौट जाते हैं।
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-दीनानाथ
शीतलहर में सबसे खराब हालत रोज कमाकर खाने वाले वालों का है। कोटे के राशन को पकाने के लिए लकड़ी, नून, तेल की व्यवस्था तो करनी पड़ती है। कमाई नहीं होने से रोटी पर संकट हो गया है।
-रामरतन, राजगीर
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