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Deoria News: कुत्तों का निवाला बन रहे बच्चे, सो रहा प्रशासन

Thu, 17 Aug 2023 12:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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जिला महिला अस्पताल  परिसर में घूम रहे आवारा कुत्ता।संवाद
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देवरिया। जनपद में आवारा कुत्ते खूंखार होते जा रहे हैं। इन कुत्तों की वजह से लोगों का जीवन तक जाने लगा है। इसके बाद भी प्रशासन इनकी धर-पकड़ या इनकी संख्या नियंत्रित करने का कोई प्रयास करते नहीं दिख रहा है। अभी बीते रविवार को ही जनपद के छपिया जयदेव गांव में कुत्तों के झुंड ने छह साल के मासूम पर हमला कर दिया था। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर खेत में काम कर रहे माता-पिता ने बच्चे को कुत्तों को छुड़ाया, तब तक वे उसे गंभीर रूप से घायल कर चुके थे।
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अब 11 माह के बच्चे की कुत्ते के नोंचने से मौत के बाद व्यवस्था पर और प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। गर्मी के दिन में कुत्ते खूंखार होकर हिंसक रुख अख्तियार कर रहे हैं। सबसे अधिक खतरा उन जगहों पर हैं, जहां पर मुर्गी फार्म, मीट मार्केट आदि है। हालत यह है कि सड़कों के किनारे मीट की दुकानें सजी रहती हैं और रात में बंद हो जाती हैं। कुत्तों का झुंड पहुंचता है और सड़क से गुजरने वाले लोगों पर हमला कर दे रहे हैं। रविवार को बघौचघाट थाना क्षेत्र के आनंद नगर की रहने वाली पानकली (52) अपने देवर हरेंद्र के साथ बाइक से इलाज कराने जा रहीं थीं। इसी दौरान कुत्ते ने बाइक पर झपट्टा मार दिया, जिससे वह गिर गईं और मौत हो गई। इसी दिन भटनी थाना क्षेत्र के छपिया जयदेव गांव निवासी संकटा के पांच वर्षीय पुत्र आयुष पर दोपहर में आधा दर्जन कुत्तों ने हमला बोल दिया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। परिजनों ने उसे मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भर्ती कराया। इसी तरह एक सप्ताह पहले आईटीआई निवासी विजय प्रकाश तिवारी जेल गेट के पास पहुंचे थे कि कुत्तों ने हमला कर दिया और वह गिरकर घायल हो गए। इन घटनाओं के अलावा जिला अस्पताल के कुत्तों के शिकार बड़े, बुजुर्ग सभी हो जा रहे हैं।

जहां लगता है इंजेक्शन, वहीं है कुत्तों का बसेरा
देवरिया। जिला अस्पताल के पुराने भवन में एआरवी इंजेक्शन कक्ष बनाया गया है। हालत यह है कि इस कक्ष के आसपास ही कुत्तों का झुंड घूमता रहता है। इतना ही नहीं जिला अस्पताल परिसर में कुत्तों का झुंड अक्सर देखने को मिला जाएगा। कई बार तो ऐसा भी देखने को मिलता है कि कुत्ते अस्पताल की बेड पर आराम फरमाते रहते हैं। इसके अलावा एमसीएच विंग स्थित महिला अस्पताल परिसर में भी मंडराते रहते हैं, जिससे गर्भवती और बच्चों को खतरा बना रहता है। यहां भी कुत्तों की रोकथाम के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
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माता-पिता मुर्गियों को डाल रहे थे दाना, बच्चा बन गया कुत्तों का निवाला
देवरिया। कन्नौज के रहने पति और पत्नी मंगलवार की शाम को मुर्गियों को जिंदा रखने के लिए दाना डाला रहे थे। 11 माह के कलेजे के टुकड़े को कुछ दूरी पर चारपाई पर सुला दिए थे। यह छोटी सी चूक ने उनको जीवन में भर के लिए ऐसा दर्द दिया है कि वह कभी भुला नहीं पाएंगे। कुछ पल में उन्हें बेटे के रोने की आवाज सुनाई पड़ी और कुत्ता भौंक रहा था। दंपति कुत्ते के मुंह में बालक को देख चिल्लाने लगे। 11 माह का मासूम कुत्ते से बचने के लिए तड़प रहा था लेकिन कुत्ता उसको नोंचते रहा। उसे बुरी तरह से जख्मी कर दिया। अस्पताल पहुंचने से पहले उसने दम तोड़ दिया था। पिता नीरज और मां किरण बेटे को याद कर अचेत होकर गिर जा रहे थे। उनमें इतनी पीड़ा थी कि वह रातोंरात अपने घर की ओर रोते बिलखते निकल पड़े। इस घटना के बाद उसका गांव में दहशत का माहौल है। हर कोई घटना को लेकर काफी मर्माहत था। सभी को अपने कलेजे के टुकड़े की चिंता सता रही थी।
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