फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Deoria News: गबन कर लापता फाइनेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक पर केस

Thu, 13 Feb 2025 02:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
विज्ञापन
विज्ञापन
देवरिया। कोतवाली क्षेत्र के रघवापुर में संचालित फाइनेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक द्वारा 8.51 लाख रुपये लेकर फरार होने के मामले में केस दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की गई है। कंपनी की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई थी। कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली गई। अब पुलिस मुकदमा दर्ज कर जांच में जुट गई है।
विज्ञापन

बरहज के खोरी निवासी अमरनाथ यादव पुत्र प्रभुनाथ यादव ने तहरीर देकर बताया था कि वह स्पन्दना स्फूर्ती फाइनेंशियल लिमिटेड में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट हैं। कंपनी का प्रधान कार्यालय अरविंदो ग्लेक्सी टावर, हाइटेक सीटी रोड हैदराबाद, तेलंगाना में है। देवरिया में कंपनी की शाखा रघवापुर थाना कोतवाली में है। इसके कलेस्टर मैनेजर बिहार के छपरा के मढ़ौरा पटरी निवासी राजीव सिंह पुत्र उपेंद्र सिंह हैं। ब्रांच मैनेजर बलिया जिले के पकड़ी थाने के पुरपकड़ी निवासी राजू अहमद पुत्र वकील अहमद हैं। ब्रांच में एक लाकर (साफायर) रहता है जिसमें कलेक्शन का पैसा रखा जाता है। लाकर की अलग-अलग दो चाबी है, इसमें एक चाबी राजू अहमद के पास रहती है। दूसरी चाबी कैशियर पिंटू कुमार के पास थी। दो फरवरी 2024 को फील्ड से पैसा कलेक्शन करना था। जिसके चलते राजू अहमद ने पिंटू से कहा कि कलेक्शन ज्यादा है तो मुझे लाकर की दूसरी चाबी भी दे दो। इस पर पिंटू ने चाबी दे दी। अमरनाथ ने बताया कि राजू अहमद ने ब्रांच के लाकर में रखा सात लाख 67 हजार 345 रुपये का गबन कर लिया। यही नहीं राजू अहमद ने दो फेक लोन कुशीनगर के दुदही निवासी सुभद्रा पत्नी अरविन्द व शालिनी पत्नी बहादुर के नाम पर 42-42 हजार रुपये का कर दिया। इसके बाद उक्त राशि का भी गबन कर लिया। जब ब्रांच के स्टाफ पिंटू, सौरभ, संदीप, विनय, करन व अन्य पहुंचे तो देखा कि लाकर की दोनों चाबी टेबल पर पड़ी थी। ब्रांच मैनेजर राजू अहमद गायब था। फोन करने पर उसका मोबाइल स्विच आफ मिला। इसके बाद लॉकर को खोलकर देखा तो उसमें से रुपये गायब मिले। कलेस्टर मैनेजर राजीव सिंह को जानकारी दी गई। इसके बाद कलेस्टर मैनेजर ने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद डायल 112 नंबर पर काल कर घटना की सारी सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद कोतवाली पुलिस को जानकारी दी गई। एसपी को भी तहरीर दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह देख अमरनाथ ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने 11 फरवरी को घटना के एक साल बाद मुकदमा दर्ज कर जांच पड़ताल में जुट गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें