तरकुलवा। विकास खंड क्षेत्र में खजुरिया रजवाहा से निकली बरईपट्टी माइनर परसौनी गांव के पास दूसरी बार टूट गई है। इससे करीब पचास किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल डूब गई। खेतों में पानी भर जाने से सरसों, आलू व सब्जी की खेती बर्बाद हो गई है। किसानों का आरोप है माइनर की सफाई के नाम पर खानापूर्ति की गई है। पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से बर्बाद हुए फसलों का सर्वे कराकर मुआवजे की मांग की है। खजुरिया रजवाहा में परसौनी गांव के पास से कनकपुरा, गुलहरिया, बेलही, बरईपट्टी होते हुए रामपुर धौताल गांव के सिवान तक माइनर जाती है। तीन दिन पहले बरईपट्टी माइनर की दाहिनी पटरी टूट गई। इससे राजाराम मद्धेशिया, सरवन मद्धेशिया, राम भरथ कुशवाहा, राम गोपाल प्रसाद, दिनेश प्रसाद, विजयी, घूरा प्रसाद, राजू चौहान, राम जनक कुशवाहा, ठगई कुशवाहा, श्यामलाल, बिंदा कुशवाहा व अन्य किसानों की गेहूं की फसल डूबकर बर्बाद हो गई। करीब दस दिन पहले बरईपट्टी माइनर नहर की बाई पटरी टूट गई थी। तब भी कई किसानों की पचासों एकड़ गेहूं व सरसों, आलू की फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई थी। किसानों ने इसकी सूचना गंडक विभाग के अधिकारियों को दी लेकिन तीन दिन तक जब कोई नहीं पहुंचा तो उन्हें खुद ही नहर को बांधना पड़ा। किसानों का आरोप है कि विभाग द्वारा हर साल नहर की सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। गंडक विभाग के जेई रमेश चौरसिया ने बताया कि नहर टूटने की सूचना मिली हैं, इसे दुरुस्त करा दिया जाएगा।