देवरिया। गोरखपुर-देवरिया-सलेमपुर फोरलेन मार्ग पर देवरिया शहर के उत्तर तरफ से बाईपास का निर्माण हो रहा है। 1734.70 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित 21.6 किमी लंबे बाईपास निर्माण कार्य पर मुआवजे के विवाद का असर पड़ रहा है।
इस परियोजना से प्रभावित करीब एक हजार से अधिक किसानों ने मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग को लेकर न्यायालय में याचिका दाखिल की है।
इनमें से करीब 350 किसानों ने प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद सुलह-समझौता कर मुआवजा प्राप्त कर लिया। जबकि 650 किसान कोर्ट में मामला लड़ रहे हैं।
इस बाईपास का निर्माण कार्य जनवरी 2025 में शुरू हुआ था। बैतालपुर के सिरजम से शुरू होकर मुंडेरा होते हुए अहिल्यापुर मोड़ के पास सलेमपुर के फोरलेन से जुड़ेगा।
परियोजना का निर्माण कार्य सीडीएस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को सौंपा गया है। सिर्फ सड़क निर्माण की लागत 588 करोड़ रुपये निर्धारित है।
वर्तमान में कंपनी ईंटवा, गुड़री, बैतालपुर, सझवां, बरारी प्रथम, बांसपार बुजुर्ग, मुंडेरा मल्ल, भीमपुर, गौरा, परसिया मल्ल, परसियां भंडारी, धनौती खुर्द, बरारी तृतीय, पड़री, पगरा और अहिरलवार गांवों में निर्माण कार्य करा रही है। कुछ स्थानों पर काम जारी है।
जबकि विवादित क्षेत्रों में निर्माण कार्य बाधित है। कई स्थानों पर पुलिया निर्माण भी कराया जा रहा है। प्रशासन की ओर से अब तक पांच हजार से अधिक किसानों के खातों में मुआवजे की राशि भेजी जा चुकी है।
भूमि बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन कर रहे किसानों का आरोप है कि सरकार ने मुआवजा निर्धारण में 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के मानकों का पालन नहीं किया है।
क्षेत्र के राजेश यादव, अशोक कुमार गुप्ता, मुन्ना यादव, गोविंद यादव, शैलेश यादव, अनिल यादव, जयप्रकाश यादव, मधुसूदन यादव, कमलावती देवी, दारा राजभर, नगीना चौहान, रमेश चौहान, नंदकिशोर पाल, कैलाश वर्मा और अशोक बरनवाल का कहना है कि मुआवजे में अनदेखी की गई है अगर मुआवजे की रकम में बढ़ोतरी नहीं होती है तो कार्य इसी तरह बाधित रहेगा। उनका कहना है कि प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा है।