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Deoria News: बच्चों को स्कूल में पढ़ाना है तो बताए गए दुकान से दोगुने दामों पर काॅपी-किताब खरीदिए

Sun, 23 Apr 2023 11:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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अंसारी रोड़ स्थित एक दुकान से कॉपी किताब की खरीदारी करते विद्वयार्थी।संवाद
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एक क्लास बढ़ते ही दोगुने हो गए किताबों के दाम, अभिभावक परेशान
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- 50 से 60 प्रतिशत कमीशन प्राइवेट पब्लिकेशन से कमा रहे निजी स्कूल और पुस्तक विक्रेता
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। तमाम कोशिशों के बावजूद निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक नहीं लगा पा रही है। प्राइवेट स्कूलों में नए सत्र में प्रवेश चल रहे हैं। एडमिशन एवं तीन महीने की फीस भरने के अलावा अभिभावक किताब-काॅपी के लिए भी मोटी रकम खर्च कर रहे हैं। हर स्कूल के अलग-अलग प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें तय हैं। कई स्कूल तो अब भी अपने परिसर में ही किताबें उपलब्ध कराकर मोटी रकम वसूल रहे हैं।
आए दिन निजी स्कूल संचालक अभिभावकों की जेब ढीली करने के नए रूल अपना रहे हैं। सुविधा के नाम पर रजिस्ट्रेशन व मासिक शुल्क में वृद्धि के साथ ही किताब-काॅपी के दाम बढ़ाकर अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। ज्यादातर मामलों में स्कूल की ओर से थमाई गई किताबों की लिस्ट किसी खास पब्लिकेशन की होगी और वह शहर के चुनिंदा दुकानों पर ही मिलेगी। इस खेल में मोटी रकम के वारे-न्यारे हो रहे हैं। माना जा रहा है कि किसी खास प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें बेचने के लिए निजी स्कूल व किताब विक्रेता 50 से 60 प्रतिशत रकम कमीशन के रूप में वसूल रहे हैं। शहर के छह से सात चर्चित स्कूलों की पाठ्य सामग्री राघवनगर में डीएम आवास के पीछे स्थित पुस्तक विक्रेता के यहां मिलती है। पिछले साल यहां सोंदा स्थित एक स्कूल के कक्षा चार के किताब-कापी का पूरा सेट 4800 रुपये में मिला था। अब वही बच्चे कक्षा पांच में पहुंचे तो उनके अभिभावकों को 9500 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
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वर्तमान सत्र में स्कूलों की ओर से दी गई नर्सरी कक्षा की लिस्ट की कापी-किताब के लिए अभिभावक को 2500 रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। 12 वीं तक आते-आते यह रकम 10 से 12 हजार रुपये तक पहुंच जा रही है। इधर बढ़े हुए दर ने अभिभावकों के पसीने छुड़ा दिए हैं।

जिम्मेदारों की चुप्पी कर रही अभिभावकों को परेशान
पुस्तक विक्रेता स्कूल संचालकों को मोटा कमीशन देकर अभिभावकों की जेब हल्की करने में कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। कई स्कूल स्वयं बच्चों को कापियां-किताबें व ड्रेस देकर अधिक दाम वसूल रहे हैं। कुछ ऐसे हैं जो पाठ्य सामग्री खुद मुहैया करवा रहे हैं। अफसर स्कूलों को मान्यता देने के बाद वहां संचालित पाठ्यक्रमों व अन्य संसाधनों की जांच करना मुनासिब नहीं समझते। इससे शिक्षा के नाम पर धन उगाही का धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।
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मौखिक बता रहे कहां मिलेंगे कापी-किताब
सरकार की सख्ती से बस इतना ही बदलाव हुआ कि अब बच्चों के एडमिशन के लिए विद्यालय पहुंचे अभिभावकों को दुकानों का हैंडबिल नहीं थमाया जा रहा। उन्हें मौखित तौर पर दुकान का पता बता दिया जा रहा है। यह तय है कि संबंधित स्कूल की किताबें और ड्रेस चिन्हित दुकान के अलावा कहीं नहीं मिल रहा है।
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किताब-कापियों के सेट के दाम
नर्सरी 2500 से 3000
एलकेजी 3000 से 4000
यूकेजी 4000 से 4500
पहली कक्षा 5000 से 6000
दूसरी कक्षा 4000 से 5000
तीसरी कक्षा 3500 से 6000
चौथी कक्षा- 3600 से 6500
पांचवीं कक्षा- 4000 से 7000
छठवीं कक्षा- 4500 से 7000
सातवीं कक्षा - 5000 से 8000
आठवीं कक्षा - 6000 से 9000
नौवी कक्षा - 4000 से 6000
ढाई सौ का जूता दे रहे 450 में
स्कूलों की मिलीभगत से दुकानदार ड्रेस की कीमत बाजार से दोगुनी लगा रहे हैं, जो जूता बाजार में ढाई सौ का मिल रहा उसे उस दुकान पर 450 रुपये में बेचा जा रहा है। सामान्य तौर पर 50 रुपये में मिल जाने वाला मोजा 100 से 120 रुपये में उपलब्ध है। यही हाल स्कूल बैग और कैप आदि सामानों का है।
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बेटा इस साल कक्षा आठ में गया है। कक्षा सात के मुकाबले इस बार किताब-कापी के दाम डेढ गने महंगे हो गए हैं। स्कूल संचालक एनसीआरटी के अलावा अपनी ओर से भी अलग किताबें खरीदवा रहे हैं। जिनके दाम एकदम हाई हैं। - .......मीना त्रिपाठी, न्यू कॉलोनी, अभिभावक
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बच्चा इस साल नौवीं कक्षा में गया है। मासिक फीस से लेकर किताब-कापी व ड्रेस तक के दाम पिछली बार से अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। स्कूल में मिलने वाले किताब कापी का सेट महंगा होने के चलते बाहर से खरीदना पड़ा। लेकिन स्कूल की ओर से बाहर की किताबें बदलने के लिए दबाव बनाया गया।
..... राजेश यादव, अभिभावक

कोई अभिभावक अगर शिकायत करता है तो इसकी जांच कराई जाएगी। कोई स्कूल अपने यहां किताब या कापी नहीं बेच सकता। अगर वह ऐसा कर रहा है तो यह गलत है।
.......डॉ. विनोद कुमार राय, डीआईओएस
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