रुद्रपुर। तहसील क्षेत्र के सर्वेक्षण में गए बाढ़ग्रस्त गांवों में परवाने में फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है। इसमें 11 परवाने फर्जी पाए गए हैं। बाढ़ से प्रभावित जिले के कुल 63 गावों में सर्वेक्षण का काम शुरू किया गया है, 41 में काम पूरा कर लिया गया है। 22 गांवों में अभी काम जारी है। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद जिला प्रशासन अब जांच कराने की तैयारी कर रहा है।
जिन गांवों में परवाना फर्जी पाया गया उनमें दलाल एआरओे न्यायालय गोरखपुर से बिना किसी आदेश के फर्जी परवाना जारी कर राजस्व अभिलेख में जमीनों पर दूसरे का नाम दर्ज करा लिए थे। रुद्रपुर में अमलदरामद जमीन पर नाम चढ़ाने के लिए सहायक अभिलेख अधिकारी गोरखपुर के न्यायालय से आए 11 परवाना फर्जी पाए गए हैं। आदेश के नाम चढ़वाने (अमलदरामद) के लिए जारी परवानों की तहसीलदार चंद्रशेखर वर्मा ने सत्यापन कराया तो मामला उजागर हुआ।
एआरओ गोरखपुर न्यायालय से आई परवाने की सत्यापन रिपोर्ट में धारा 49 के तहत दाखिल परिवाद शंकर बनाम जगदीश मौजा जगदीशपुर, रामअशीष बनाम रामाश्रय मौजा इस्लामाबाद, रविंद्र बनाम रमाकांत मौजा सरांव बुजुर्ग, अशोक बनाम रामाज्ञा मौजा बिशुनपुर बगही, राणाप्रताप बनाम सूबेदार मौजा कोड़र, शीतल आदि बनाम ग्राम सभा मौजा जगरनाथपुर, कोमल बनाम श्याम बिहारी मौजा हौली बलिया, राणाप्रताप बनाम सूबेदार मौजा हौली बलिया, सूरसती बनाम धनावती मौजा भेलउर, शंकर बनाम बसंत मौजा भेलउर तहसील रुद्रपुर से संबंधित नाम चढ़वाने (अमलदरामद) के सभी परवाने फर्जी मिले। अपनी सत्यापन रिपोर्ट में सहायक अभिलेख अधिकारी गोरखपुर ने बताया है कि एआरओ न्यायालय से ऐसा कोई भी परवाना जारी नहीं किया गया है। ः आपदा के बाद सर्वेक्षण में गए गांवों में फर्जीवाड़े का खेल नया नहीं है। इन गांवों में अखिलेखों के रिकाॅर्ड आपरेशन के नाम पर दलाल काश्तकारों से जमकर धनउगाही करते रहे हैं। भूमि के खारिज-दाखिल में मोटी रकम लेकर फर्जी आदेश जारी कराने के खेल में वह मनमाना रुपये ऐंठते हैं। जमीनों का बैनामा होने के बाद खारिज-दाखिल का केस एआरओ कोर्ट गोरखपुर से हो रहा था। इसके नाम पर बिचौलियों ने काश्तकारों से रुपये लेकर फर्जी आदेश जारी करा लिया। जब अमलदरामद परवाने की जांच हुई तो फर्जी पाया गया। रुद्रपुर के सभी मामलों में काश्तकारों को धोखे में रखकर फर्जी आदेश और परवाना जारी कराया गया।