रुद्रपुर में बारिश के अभाव में सूखने के कागार पर पहुंची धान की नर्सरी
लगातार फसलों की बर्बादी का दंश झेल रहें रुद्रपुर के किसान मानसून को लेकर परेशान हैं। मानसून की आस में धान की बेहन डालकर रोपाई को सोच रहे किसानों की सांस अटकी हुई है। सामान्य से अधिक वर्षा की अपेक्षा में कर्ज लेकर खरीफ की बुआई का इंतजाम कर चुके किसानों को मानसून की बेरुखी की चिंता सताने लगी है। पर्याप्त बारिश नहीं हाने से बेहन खेतों में सूखने लगी है।
मौसम विज्ञानियों के पूर्वानुमान के अनुसार इस साल सामान्य से भारी बारिश की अपेक्षा की गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने 15 जून के पहले ही बरसात शुरू हो जाने का अनुमान लगाया था। लेकिन निर्धारित अवधि के पांच दिन बीतने के बाद भी धनघोर बारिश नहीं शुरू हो पाई। जून में दो दिन छिटप़ुट बारिश के अलावा आधा मास भीषण गर्मी और उमस में निकल गया। अच्छी खासी बारिश होने की आस में किसानों ने पहले ही धान की बेहन डाल कर रोपाई की तैयारी कर ली थी। लेकिन बारिश नहीं होने से खेतों में धान की बेहन सूख रही है।
रुद्रपुर के किसान नवरतन पांडेय, रामनवल पांडेय, मदन यादव, सचिंद्रनाथ पांडेय, सुभाष यादव, शोमनाथ साहनी आदि ने कहा कि गेहूं और धान की दो फसले बर्बाद होने के बाद किसान पूरी तरह कर्ज में डूबे हैं। इस बार अच्छी बरसात की उम्मीद लगाई गई है। लेकिन जून का आधा महीना बीतने के बाद भी बारिश का नामोनिशान नहीं है। बर्बाद फसलों की राहत के नाम पर किसानों को कुछ खास नहीं मिला। खेती करने की मजबूरी उन्हें कर्ज के बोझ तले दबाती जा रही है। बारिश नहीं होने से धान की रोपाई करने को सोच रहे किसान पेशो पेश में हैं। कमजोर मानसून से किसानों की सांसे अटकी है। यदि इस बार बारिश नहीं हुई तो किसान कही का नहीं रहेगा।