सातवें दिन तिरुमज्जन अभिषेक, द्वादशाराधन, पुष्पयाग, श्रीवेंकटेश की सवारी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कसया रोड स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर में आयोजित श्री ब्रह्मोत्सव कार्यक्रम अंतिम दिन नादस्वर की प्रतिध्वनियों व वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीवेंकटेश भगवान का तिरुमज्जन अभिषेक किया गया। दक्षिण भारत से आए आचार्यों ने विधि-विधान से इस संपन्न कराया। इसके पूर्व परिसर भगवान की भव्य सवारी निकाली गई। रथ खींचने के लिए साधकों में होड़ सी लगी रही।
बालाजी मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी राजनारायणाचार्य की देखरेख में सोमवार की सुबह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नित्ययज्ञ एवं तिरुमज्जन अभिषेक का आयोजन हुआ। शाम को परिसर में द्वादशाराधन, पुष्पयाग के बाद यज्ञ की पूर्णाहुति हुई। साथ ही परिसर में पूरे दिन तिरुपति से नादस्वर बजाने आई टीम ने अपनी प्रस्तुतियों से साधकों को बार-बार वेंकट रमणा गोविंदा, गोंविदा का जयघोष कराया। अंत में श्रीवेंकटेश भगवान की सवारी निकालने के बाद ध्वजावरोहण, महाकुंभ प्रोक्षण संस्कार संपन्न हुआ।
पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी राजनारायणचार्य ने कहा कि विश्व के कल्याण के लिए इस महायज्ञ का आयोजन किया गया। बाहर के अलावा स्थानीय साधक पूरे एक सप्ताह तक इस पल के गवाह बने। कार्यक्रम को संपन्न कराने में चेन्नई से आए एस सम्पत्कुमार भट्टाचारियर, तिरुचैरे सारनाथन, तमिलनाडु के प्रधान अर्चक श्रीरामन भट्टाचारियर, वृंदावन से राजगोपालन भट्टाचार्य, आचार्य शैलेष स्वामी, जगद्गुरु स्वामी अनन्ताचार्य, स्वामी रामचंद्राचार्य का विशेष सहयोग रहा।