अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजनाएं अधूरी रह जा रही है। तमाम योजनाओं के शासनादेश ही नहीं जिला मुख्यालय तक पहुंच पा रहे हैं। यहीं नहीं जिला का विभाग तो कई वर्षों से उधार के अधिकारियों से चल रहा है। ऐसे में अल्पसंख्यक कल्याण की बात बेमानी साबित हो रही है। प्रत्येक वर्ष 18 दिसंबर को अल्पसंख्यक कल्याण दिवस मनाया जाता है। इसमें अल्पसंख्यक कल्याण के लिए संचालित होने वाली योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला जाता है। अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक बेहतरी के लिए अपील की जाती है। कृषि, गन्ना, लघु सिंचाई, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में नामांकन का लक्ष्य हासिल तो हो गया है लेकिन सरकारी योजनाओं में 20 प्रतिशत मात्राकरण के लक्ष्य को हासिल करने में विभाग असफल साबित हो रहा है। इससे अल्पसंख्यक कल्याण की बातें बेमानी साबित हो रही है।