रसोई गैस सिलिंडरों की आपूर्ति में गड़बड़ी का मामला
कई एजेंसियों पर लोग बुकिंग का भी सिलिंडर दूसरे को बेचने का लगा चुके हैं आरोप
सिलिंडर का वितरण तो एजेंसी करती है, फिर केवल दुकानदारों पर ही हो रही कार्रवाई
देवरिया। रसोई गैस सिलिंडरों की किल्लत के बीच कालाबाजारी के भी खूब मामले सामने आ रहे हैं। होटल-रेस्टोरेंट से लेकर ठेलों तक पर घरेलू रसोई गैस सिलिंडरों का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। इस पर रोक लगाने के नाम पर दुकानों पर छापा भी खूब पड़ रहा है। लेकिन आश्चर्य यह है कि ये सिलिंडर आखिर कहां से ब्लैक हो रहे हैं और दुकानदाराें तक कैसे पहुंच रहे हैं, प्रशासन इसकी जांच नहीं करा रहा। जबकि लोग सीधे-सीधे गैस एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसियों पर किसी तरह की ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। हालात यह हैं कि लोगों को अपनी बुकिंग के बाद भी समय से सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। कई उपभोक्ता हफ्तों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन डिलीवरी नहीं हो रही। इससे घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है और लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पथरदेवा निवासी सोबराती ने बताया कि स्थानीय कस्बे के कई उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनके नाम पर बुक हुआ सिलिंडर किसी और को बेच दिया गया है। एजेंसी पर जाने पर वहां से जवाब मिलता है कि अगली तारीख पर बुक किजिएगा, आपको सिलिंडर मिल जाएगा। ऐसे भी लोग हैं, जिनके खाते में सब्सिडी का पैसा पहुंच गया, लेकिन उनको भरा हुआ सिलिंडर नहीं मिला। आखिर ये सिलिंडर कहां गए। रसोई गैस उपभोक्ताओं का कहना है कि दूसरों के नाम पर बुकिंग का यह सिलिंडर ही ब्लैक हो रहा है। यही सिलिंडर होटल व रेस्टोरेंट वाले डेढ़ गुना रेट पर खरीदकर अपना काम चला रहे हैं।
-
एजेंसी पर रहता है पेपर, वहीं से होती है बुकिंग
रसोई गैस उपभोक्ता रविंद्र, सुजीत आदि बताते हैं कि जब भी कोई रसोई गैस का कनेक्शन लिया जाता है तो उससे संबंधित एक पेपर एजेंसी पर रहता है। एजेंसी के कर्मचारी ऐसे उपभोक्ताओं का पेपर खोजकर निकाल लेते हैं जो नियमित अपने मोबाइल नंबर से बुकिंग नहीं करते। ऐसे उपभोक्ताओं के पेपर पर ही बुकिंग करके वह सिलिंडर एजेंसी से सीधे ब्लैक कर दिया गया है। यही सिलिंडर होटल-रेस्टोरेंट वाले उठा रहे हैं। इसमें पकड़े जाने का खतरा कम रहता है और पैसा भी पूरा मिल जाता है।
-
जांच हो तो खुल जाएगा पूरा खेल
रसोई गैस वितरण के इस खेल को नजदीक से जानने वालों का कहना है कि प्रशासन अगर ईमानदारी से एक भी प्रकरण की जांच करा दे तो पूरा खेल खुल जाएगा। दरअसल हर बुकिंग रजिस्टर्ड है और शहरी क्षेत्र में बुकिंग करने पर वितरण वाले कर्मचारी का नाम भी दर्ज होता है। मतलब यह कि एजेंसी से किस कनेक्शन नंबर का सिलिंडर किसने पहुंचाया, यह भी रिकार्ड में दर्ज होता है। ऐसे में अगर कोई सिलिंडर किसी होटल या रेस्टोरेंट में पकड़ा गया है तो छानबीन में यह पता चल सकता है कि किस एजेंसी से यह सिलिंडर ब्लैक हुआ है। लेकिन ऐसा न करके प्रशासन केवल उस होटल या रेस्टोरेंट वाले पर ही प्राथमिकी दर्ज कराता है, जिसकी दुकान में यह सिलिंडर पकड़ा गया। इतना ही नहीं पकड़ा गया सिलिंडर फिर उसी एजेंसी को सौंप भी दिया जाता है। जबकि जांच एजेंसी की भी होनी चाहिए थी।