ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भाजपा ने परचम लहराया, सपा की झोली में गई दो सीटें
देवरिया। ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भाजपा का दबदबा कायम रहा। 16 सीटों में छह विकास खंडों में निर्विरोध एवं दस में हुए चुनाव में छह सीटों पर भाजपा प्रत्याशी चुनाव जीत गए। भटनी एवं भाटपाररानी में सपा प्रत्याशियों को सफलता जरूर मिली। भलुअनी और लार में भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बावजूद दोनों प्रत्याशियों ने जीत हासिल कर भाजपा नेतृत्व को अपनी दमदारी दिखाई। चुनाव में इन्हें कमजोर करने के लिए इनके घर एवं समर्थकों के यहां पुलिस ने कई बार दबिश दी। चुनाव जीत जाने के बाद भाजपा अब इन्हें फिर अपना बता रही है।
ब्लाक प्रमुख के चुनाव में कृषि मंत्री ने पथरदेवा से अपने बेटे सुब्रत शाही, राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद ने गौरीबाजार से अपनी बहू अनीता निषाद, बासगांव सांसद कमलेश पासवान ने रूद्रपुर से उषा पासवान, विधायक कमलेश शुक्ला ने ने रामपुर कारखाना से उषा त्रिपाठी, कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने तरकुलवा से रामअशीष गुप्ता को निर्विरोध ब्लाक प्रमुख बनवा लिया था। जबकि बनकटा में बिंदा कुशवाहा, अन्य प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने के बाद निर्विरोध निर्वाचित घोषित की गई। दस विकास खंडों में हुए चुनाव में छह विकास खंडों में भाजपा ने जीत हासिल की है।
दो सपा और दो भाजपा के ही कार्यकर्त्ता बगावत करके चुनाव लड़े और जीत हासिल की। इनका साथ कार्यकर्त्ताओं ने दिया। यूं कहा जाए कि इन्हें चुनाव जीतकार कार्यकर्त्ताओं ने संगठन के ऐसे लोगों को एक संदेश जरूर दिया कि टिकट भले ही पार्टी दें देगी लेकिन जीतेगा वहीं जिसे कार्यकर्त्ता चाहेंगे। भलुअनी में छट्ठू यादव के बड़े भाई गिरेंद्र प्रताप यादव प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष हैं। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सलेमपुर सांसद रवींद्र कुशवाहा और भाजपा प्रत्याशी गिरीश तिवारी, जिलाध्यक्ष भाजपा अंतर्यामी सिंह, कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही के कहने पर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में कई जिला पंचायत सदस्यों को लामबंद किया था। बावजूद उन्हें टिकट नहीं दिया गया तो भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के निर्णय से नाराज हो गए। विधायक जहां भाजपा के घोषित प्रत्याशी के साथ जोर लगाए थे, वहीं बासगांव के सांसद कमलेश पासवान के करीबी भाजपा कार्यकर्त्ता छट्ठू यादव के पक्ष में लामबंद हो गए। लार से चुनाव जीती अनुभा सिंह के साथ भी ऐसा ही रहा। सांसद रवींद्र कुशवाहा बार-बार पार्टी नेतृत्व को इस बात की दुहाई देते रहे कि अनुभा सिंह के पति अमित सिंह बबलू पुराने कार्यकर्ता हैं। पहले से तैयारी की है लेकिन पार्टी के जिम्मेदारों ने उनकी एक न सुनी।
एजेंट के रूप में कार्य करने का पुलिस पर लगा आरोप
देवरिया। जिले की पुलिस पर सत्ता के दबाव में एजेंट के रूप में कार्य करने का आरोपग सपा एवं भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बावजूद भी चुनाव जीते नेताओं ने लगाया है। संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी ने प्रशासन और पुलिस पर खूब दबाव बनाया। चर्चा है कि चुनाव के दौरान भाजपा के कतिपय नेताओं ने प्रशासन पर दबाव बनाकर लोकतंत्र की ऐसी तैसी करा दी। प्रशासन इनके इशारे पर प्रत्याशियों को न केवल धमकाता रहा बल्कि कई नेताओं को घर से उठाकर थाने में लाकर बंद कर दिया। भाजपा नेताओं के इशारे पर भलुअनी के एक पूर्व ब्लाक प्रमुख का अपहरण बदमाशों ने कर लिया। मदनपुर थाने में केस दर्जन हो संगठन के जिम्मेदार एक पदाधिकारी नेअधिकारियों एवं थाने में फोन कर गैगस्टर, एवं हिस्ट्रीशीटर बदमाशों की पैरवी की। देवरिया सदर से सपा से चुनाव लड़ रहे सोहन गुप्ता के बड़े भाई सपा के प्रांतीय नेता मोहन गुप्ता के घर पुलिस ने ताडंव किया। बतौर मोहन गुप्ता उनके यहां पांच बार कोतवाली पुलिस ने चुनाव के दौरान एक सप्ताह में दबिश दी। दो बार जबरन कोतवाली ले जाकर लाकअप में बंद कर दिया। बाद में सपा नेताओं ने दबाव बनाया तो छोड़ा। लार से चुनाव जीती अनुभा सिंह के पति अमित सिंह बबलू की मानें तो पुलिस ने उन्हें धमकी दी। उनके समर्थकों एवं उनके घर कुछ भाजपा नेताओं के इशारेपर दबिश देकर प्रताड़ित किया। उनके आठ से दस वोटरों को धमकाकर भाजपा प्रत्याशी को वोट दिलवाया गया। भटनी से चुनाव जीती ब्लाक प्रमुख रनिया देवी का कहना है कि उनके यहां कई बार दबिश दी गई। फर्जी केस में उनके पति को फंसाया गया। लार से पत्नी को चुनाव लड़ा रहे राजीव सिंह राजू पहाड़ी ने पुलिस प्रताड़ना से चुनाव लड़ने से मना कर दिया।
विधायक आशुतोष और पूर्व विधायक गलाजा लारी ने बचाई सपा की इज्जत
देवरिया। जिस तरीके से सत्ता के बल पर आतंक कुछ लोगों ने ब्लाक प्रमुख चुनाव में कायम किया था। उसमें भाटपाररानी के विधायक आशुतोष उपाध्याय ने भाटपारानी में सपा प्रत्याशी सोनमती और पूर्व विधायक गजाला लारी ने भटनी से निवर्तमान प्रमुख रनिया देवी को चुनाव जीताकर सपा का सम्मान बचा लिया। दोनों नेताओं ने यह संदेश प्रशासन को भी दिया है कि पुलिस की दबिश एवं धमकी से वह डरने वाले नहीं हैं। विधानसभा का टिकट मांगने वाले अन्य नेता अगर ऐसी बहादुरी दिखाते तो और भी सीटें सपा जीत सकती थी। बरहज विधानसभा से सपा से टिकट मांगने वाले कुछ नेता तो भाजपा प्रत्याशियों को जिताने में जुटे हुए थे।