संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। विश्व भोजपुरी सम्मेलन के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने कहा कि भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग संस्था सरकार से लगातार कर रही है।
20 करोड़ से अधिक लोगों की भोजपुरी भाषा को अब तक संवैधानिक मान्यता नहीं मिलना राजनीति में व्याप्त भेदभाव का परिणाम है।
भोजपुरी भाषा विश्व के सांस्कृतिक ताने-बाने की एक मजबूत कड़ी बन चुकी है। गिरमिटिया मजदूरों के रूप में विदेशों में गए लोगों ने अपनी मातृभाषा को जीवित रखा है और आज भी कई देशों में भोजपुरी संस्कृति पर्वों के रूप में मनाई जाती है। बावजूद इसके यह भाषा सरकारी स्तर पर उपेक्षित रही है।
वह रविवार को रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक होटल में आयोजित बैठक काे संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि विधानसभा में भोजपुरी को राजभाषा का दर्जा दिया जाए और राज्य में भोजपुरी अकादमी की स्थापना को मंजूरी दी जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने पहली बार विधानसभा में भोजपुरी को सम्मान दिलाया है।
संस्था के प्रांतीय इकाई के संरक्षक के रूप में इतिहासकार दिवाकर प्रसाद तिवारी (देवरिया), उपाध्यक्ष ओमप्रकाश चौबे (वाराणसी) और शंभूनाथ चौबे (आगरा) को तथा सचिव पद पर हीरालाल हीरा (बलिया) और संगीता सिंह (देवरिया) को नियुक्त किया गया है।
वर्ष के अंत तक प्रांतीय अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। जूनियर शिक्षण प्रबंधक संघ की अध्यक्ष और संस्था की प्रदेश सचिव बनाई गईं संगीता सिंह ने कहा कि भाेजपुरी भाषा व साहित्य को आगे बढ़ाने की जो जिम्मेदारी उन्हें मिली है, वह इस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगी।
इस दौरान युवराज प्रताप सिंह, मुकेश मिश्रा, दीपक मौर्या, सूरज पटेल, संदेश शर्मा, नागेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।