उन्होंने जमीन के बैनामा दस्तावेज में सत्यप्रकाश के हिस्से की जमींन भी लिखवा ली है। सत्यप्रकाश की आपत्ति पर नौ साल से सुनवाई चल रही थी। इसी बीच दो अक्तूबर को सामूहिक हत्याकांड में प्रेमचंद यादव और आपत्तिकर्ता सत्यप्रकाश दुबे की हत्या हो गई।
इसे भी पढ़ें: मेडिकल कॉलेज में बढ़ेगी सुविधा, सिंगल डोनर प्लेटस्ट्स की होगी व्यवस्था
सत्यप्रकाश और उनके परिवार के पांच लोगों की सामूहिक हत्या का मामला करीब 15 दिनों तक पूरे प्रदेश में सुर्खियों में रहा। वादी और आपत्तिकर्ता की हत्या के बाद तहसीलदार न्यायालय से मृतक प्रेमचंद यादव और रामजी यादव के पक्ष में आदेश पारित होने के बाद एक बाद फिर मामला गरमाता नजर आ रहा है। कानून के जानकार तहसीलदार के फैसले को त्रुटिपूर्ण बता रहे हैं।