फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Deoria News: कर्ज चुकाने में बनीं कर्जदार...छूट गया घर-द्वार

विज्ञापन
विज्ञापन
तरकुलवा/बाघौच घाट। माइक्रोफाइनेंस कंपनियों ने गरीब और बिना पढ़ी-लिखी महिलाओं को कर्ज के जाल में फंसाकर कंगाल कर दिया है। कर्ज के बोझ तले ऐसी दब चुकी हैं कि उनको अपना घर तक छोड़ना पड़ गया है।
विज्ञापन

बहुत सी महिलाएं दूसरे प्रांतों में जाकर मजदूरी करने को मजबूर हो रही हैं। खेत बंधक है, परिवार बिखर गया है लेकिन कर्ज बढ़ता ही जा रहा है। एजेंटों का खौफ महिलाओं के सिर पर इस कदर सवार रहता है कि वे किसी के सामने मुंह खोलने से डरती हैं।
जानकारी के अनुसार, पथरदेवा व तरकुलवा विकास खंड के गांवों में एक दर्जन से अधिक माइक्रोफाइनेंस कंपनियां अपना जाल फैला चुकी हैं। इन कंपनियों के एजेंट गांवों में मुसहर, तुरहा, दलित, राजभर आदि बस्तियों में पहुंचकर आर्थिक रूप से कमजोर और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लॉलीपॉप देकर अपने जाल में फंसाते हैं। इसके अलावा आसान केवाईसी प्रक्रिया और कम ब्याज दर का हवाला देकर बकरी पालन, मुर्गी पालन इत्यादि रोजगार के नाम पर उनका लोन करते हैं। लोन की स्वीकृति होने पर साप्ताहिक ब्याज की किस्त वसूलते हैं।
विज्ञापन

कुछ दिनों तक ठीक ठाक काम कर महिलाओं को अपने विश्वास में लेने के बाद एजेंट उनके द्वारा जमा की गई किस्त की रकम को कंपनी के खाते में जमा न कर अपनी जेब में रख लेते हैं। धीरे-धीरे कर्ज का बोझ बढ़ता जाता है। एक लोन का कर्ज अधिक हो जाने पर एजेंट दूसरे, तीसरे कंपनियों का लोन दिलाकर पहले के लोन की रकम को जमा कर देते हैं।
धीरे-धीरे एक महिला के ऊपर 10 से 12 फाइनेंस कंपनियों का लोन हो जाता है। अंत में मूलधन जस का तस बना रहता है और ब्याज की रकम चुकाते चुकाते खेत-बाड़ी रेहन हो जाता है। एजेंट घर पहुंच उनके साथ अभद्रता करते हैं। उनके घर में रखा सामान, पालतू जानवर बकरी, गाय, भैंस आदि को जबरन लेकर चले जाते हैं। गैस सिलिंडर, टेलीवीजन इत्यादि घरेलू सामान उठा ले जाते हैं।
इससे तंग आकर महिलाएं घर छोड़ कर दूसरे शहरों में जाने को मजबूर हो जाती हैं। पति, बच्चों और बेटियों के साथ मजदूरी कर लोन के ब्याज की रकम चुकाती रहती हैं। कई महिलाएं तो आत्महत्या करने को विवश हो जाती हैं।
कई बार कुछ पीड़ित हिम्मत जुटा कर थाने में कर्मचारियों और एजेंटों के खिलाफ केस भी दर्ज करती हैं, लेकिन कुछ दिन बाद मामला रफा दफा हो जाता है। इस लिए महिलाएं अब थाने में शिकायत करने से भी सहमती हैं। भीतर ही भीतर घुटकर जीना उनकी बदकिस्मती हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें