समिति की खुद की नहीं है जमीन, सुविधाओं का है टोटा मंडी के लिए समिति की खुद की जमीन नहीं है
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू नदी तट पर बसा बरहज कभी व्यापारिक हब माना जाता था। लेकिन आज भी मंडी के लिए समिति की खुद की जमीन नहीं है। भारी बारिश के कारण मंडी में चारों ओर कीचड़ ही कीचड़ हो गया है। यदि कभी मंडी में आएं तो संभलकर, यहां सुविधाओं का टोटा है।
बृहस्पतिवार देर रात मानसून के दस्तक देने के बाद से लगातार रुक-रुक कर हो रही झमाझम बारिश से चारों ओर पानी ही पानी हो गया है। बरहज मंडी में जलनिकासी आदि का समुचित प्रबंध न होने के कारण दुकानों के सामने जगह-जगह पानी लग गया है। जबकि रास्ता कीचड़ से पट गया है। सामानों की खरीदारी करने जा रहे नगर-क्षेत्र के लोग बचकर नहीं चलने पर कीचड़ में फिसलकर सराबोर हो जा रहे हैं। जिसकी सुधि लेने कोई नहीं है। लोगों के अनुसार देवरिया के बाद बरहज को नगरपालिका का दर्जा मिला है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की आबादी 36459 है। वहीं व्यापारिक हब होने के कारण करीब 10-12 किलोमीटर के गांवों के लोगों की आवाजाही रहती है। मुन्ना बरनवाल, भावेश बरनवाल, महेश्वर मद्धेशिया आदि का कहना है कि मंडी समिति के लिए किसी जनप्रतिनिधि की ओर से पहल नहीं किए जाने से प्राइवेट बाजार में दुकान लगाना मजबूरी है। इसमें जलनिकासी, सड़क, पानी, नाली-नाला, पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। बारिश के मौसम में गंदगी का अंबार रहता है। जबकि जगह-जगह पानी लगने के कारण कीचड़ से पट जाता है। लोगों का यह भी कहना है कि जगह नहीं होने के कारण अधिकांश दुकानदार सड़क की पटरियों पर भी दुकानें सजाते हैं। जिससे बाजार में अक्सर जाम लग जाता है।
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जमीन की तलाश कराई जा रही है। उचित जगह पर जमीन मिलते ही दुकानों को शिफ्ट करा दिया जाएगा।
चंद्रकृष्ण पांडेय अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका बरहज