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Deoria News: खुशबू और स्वाद के लिए कर रहे हैं कृत्रिम फ्लेवर का उपयोग

Tue, 03 Mar 2026 02:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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पडरौना। अगर आप इस होली पर गिफ्ट देने या घर लाने के लिए बाजार से रेडीमेड गुझिया खरीदने जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आकर्षक डिब्बों में सजी ये गुझिया हर बार शुद्ध और सुरक्षित नहीं होती। शहर और आसपास के इलाकों में खराब मावा, सिंथेटिक खोआ और कई बार बासी सामग्री से गुझिया तैयार कर धड़ल्ले से बेची जा रही है। दिखने में सुंदर और सस्ती ये गुझिया आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और स्थानीय स्तर पर सामने आई हकीकत यह संकेत दे रही है कि त्योहार की मिठास में मिलावट का जहर घुल चुका है।
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होली से पहले बाजार में गुझिया की मांग अचानक बढ़ गई है। जिले के पडरौना, हाटा,कसया, तमकुहीराज प्रमुख बाजारों और मिठाई की दुकानों पर 350 से 650 रुपये प्रति किलो तक के आकर्षक गिफ्ट पैक उपलब्ध हैं। पड़ताल में पाया गया कि थोक बाजार में बिना ब्रांड की गुझिया खुले कार्टन में सप्लाई हो रही है। एक दुकानदार ने ऑफ रिकॉर्ड माना कि मुनाफा कम होने की वजह से सस्ता माल लेना पड़ता है। दुकानदारों के अनुसार, अब लोग घर पर बनाने के बजाय रेडीमेड गुझिया को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बढ़ती मांग ने स्थानीय स्तर पर अस्थायी उत्पादन यूनिटों को बढ़ावा दिया है, जहां गुणवत्ता और स्वच्छता के मानकों की अनदेखी हो रही है।
पड़ताल में सामने आया है कि कई जगह लागत कम करने के लिए घटिया और सस्ते कच्चे माल का उपयोग किया जा रहा है। थोक बाजार से टूटे और नमी वाले मेवे खरीदे जा रहे हैं, जबकि महंगे शुद्ध मावा की जगह सिंथेटिक खोआ इस्तेमाल किया जा रहा है। तैयार गुझिया को आकर्षक पैकिंग में रखकर ब्रांडेड उत्पाद के रूप में बेचा जा रहा है, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो जाते हैं। शहर के एक ग्राहक राजेश गुप्ता ने बताया कि पिछले साल बाजार से गिफ्ट पैक खरीदा था। खाने के बाद बच्चों को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। डॉक्टर ने बाहर की मिठाई खाने से बचने की सलाह दी। अब हम बिना भरोसे के कहीं से मिठाई नहीं लेते। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुछ पैक्ड गुझिया में लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि और सामग्री का पूरा विवरण नहीं मिला। यह सीधे तौर पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन है। उत्पादन या बिक्री पर स्थायी रोक की कार्रवाई कम ही होती है। इससे मिलावट करने वालों में कार्रवाई का डर कम हो गया है।
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- मिलावटी खोआ और खराब मेवा से बनी मिठाइयां सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। सिंथेटिक और बासी सामग्री से बनी गुझिया खाने से फूड प्वाइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट संक्रमण का खतरा रहता है। कई मामलों में मरीजों को अस्पताल में भर्ती तक करना पड़ता है। -डॉ. उपेंद्र कुमार, फिजिशियन

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सस्ते के चक्कर में ऐसा करते हैं दुकानदार
मिठाई कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि असली खोआ और अच्छी गुणवत्ता के मेवे महंगे होते हैं। ऐसे में कई छोटे निर्माता लागत कम करने के लिए सिंथेटिक खोआ, खराब या पुराने मेवे जैसे सस्ते विकल्पों का इस्तेमाल करते हैं। इससे उत्पादन लागत कम हो जाती है और मुनाफा बढ़ जाता है। एक स्थानीय मिठाई कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, असली खोआ महंगा है। कुछ लोग पाउडर और सिंथेटिक सामग्री से खोया जैसा मिश्रण तैयार कर लेते हैं। ग्राहक पैक देखकर खरीद लेते हैं, अंदर की गुणवत्ता जांच नहीं पाते।
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ऐसे बन रही गुझिया
शहर के कई बड़े प्रतिष्ठानों से लेकर छोटी दुकानों पर इन दिनों धड़ल्ले से गुझिया तैयार की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि यहां सस्ते मेवे और संदिग्ध खोआ का उपयोग किया जा रहा था। तैयार गुझिया को प्लास्टिक ट्रे में रखकर गिफ्ट बॉक्स में पैक किया जा रहा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस तरह की यूनिट हर साल होली से पहले ही सक्रिय होती हैं।

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ऐसे पहचानें सुरक्षित गुझिया

- पैक पर लाइसेंस नंबर और निर्माण तिथि जरूर देखें
- बहुत कम कीमत वाले उत्पाद से सावधान रहें
- खुली और बिना लेबल वाली गुझिया न खरीदें
- गंध, रंग या स्वाद संदिग्ध लगे तो न खाएं
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कोट...
-लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। बिना लाइसेंस और मानक के विपरीत उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सैंपल फेल होने पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। -प्रदीप कुमार राय, सहायक आयुक्त खाद्य-द्वितीय खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कुशीनगर
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